पटना: आपसी समन्वय स्थापित होने से खुलते हैं सुलह के मार्ग

पटना सिटी : पारिवारिक विवाद व घरेलू हिंसा में कानूनी पक्षों को अपना कर आपसी समन्वय स्थापित करने से सुलह के मार्ग खुलते हैं. खासतौर पर घरेलू हिंसा व पति-पत्नी के आपसी विवाद में पहले जहां सीधे प्राथमिकी दर्ज होती थी,अब सुलह के मार्ग खुले हैं. इसका परिणाम यह है कि परिवार के टूटने की […]

पटना सिटी : पारिवारिक विवाद व घरेलू हिंसा में कानूनी पक्षों को अपना कर आपसी समन्वय स्थापित करने से सुलह के मार्ग खुलते हैं.
खासतौर पर घरेलू हिंसा व पति-पत्नी के आपसी विवाद में पहले जहां सीधे प्राथमिकी दर्ज होती थी,अब सुलह के मार्ग खुले हैं. इसका परिणाम यह है कि परिवार के टूटने की संभावना कम होती है. थानों में भी एफआईआर की संख्या में कमी आयी है.
यह बात चौक थाना परिसर में सोमवार को बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान व महिला विशेष कोषांग की ओर से आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने कही. परिचर्चा में समाज के प्रबुद्ध नागरिक, पार्षद व समाजसेवियों ने हिस्सा लिया. वक्ताओं ने कहा कि महिला कोषांग के माध्यम से परिवार को जोड़ने का काम किया जाता है, तोड़ने का नहीं. संस्थान से आये सीनियर रिसर्च एसोसिएट चितरंजन सहाय एवं रिसर्च एसोसिएट आशीष कुमार सिंह ने आयोजन में महिला विकास निगम के तहत संचालित कोषांग में अब तक के कार्यकलाप की समीक्षा की गयी.
कोषांग की रूबी सिन्हा ने बताया कि अब तक 320 मामले आये हैं.इनमें महज पंद्रह मामलों में ही प्राथमिकी दर्ज की गयी. 286 मामलों का निष्पादन समझौता व सुलह से कराया गया.आयोजन में शामिल चौक थाना के अध्यक्ष मितेश कुमार ने काउंसेलर की भूमिका को सराहा. परिचर्चा में पार्षद मनोज कुमार उर्फ मुन्ना जायसवाल, तारा देवी आदि थे.

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