फुलवारीशरीफ : सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक की कड़ी में रविवार को वाल्मी में महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं रजनीश कुमार द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक ‘पिता के अरमान’ की प्रस्तुति की गयी. नाटक की शुरुआत सौरभ राज के गीत … पुजले मात-पिता के बंदे तब चैन मिली ममता के से की गयी.नाटक में यह दिखाया गया कि प्रिया नाम की लड़की लव मैरिज करके पापा के पास आयी और कहने लगी पापा मैंने अपने पसंद के लड़के से शादी कर ली है. उसके पापा बहुत सुलझे हुए शख्स थे. उन्होंने बस अपनी बेटी से इतना ही कहा- मेरे घर से निकल जा.
बेटी ने कहा अभी इनके पास कोई काम नहीं है हमें रहने दीजिए हम बाद में चले जायेंगे, पर उसके पापा एक नहीं सुनी और घर से उसे बाहर कर दिया. कुछ साल बीत गये अब प्रिया के पापा इस दुनिया में नहीं रहे. दुर्भाग्यवश जिस लड़के से प्रिया ने शादी की थी वह उसे धोखा देकर भाग गया. प्रिया की एक लड़की और एक लड़का था. प्रिया खुद का एक रेस्टोरेंट चला रही थी, जिससे उसका जीवनयापन हो रहा था. प्रिया को जब पता चला कि अब उसके पापा नहीं रहे तो उसने मन में सोचा अच्छा हुआ मुझे घर से निकाल दिये थे. दर-दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ दिये थे. मेरे पति के छोड़ जाने के बाद भी मुझे घर नहीं बुलाया. मैं तो नहीं जाऊंगी अंतिम यात्रा में उनके, पर चाचा बोले प्रिया हो आओ. जाने वाला शख्स तो चला गया अब उनसे दुश्मनी कैसी. प्रिया पहले ना किया. फिर सोचा चलो हो आती हूं. देखूं जिन्होंने मुझे ठुकराया वह मरने के बाद कैसे सुकून पाते हैं.
प्रिया के पापा की अंतिम यात्रा शुरू हुई. सब रो रहे थे, पर प्रिया दूर खड़ी थी. जैसे-तैसे सब कार्यक्रम निबट गये. प्रिया के चाचा प्रिया के हाथ में एक खत देते हुए उन्होंने प्रिया से कहा यह तुम्हारे पापा ने तुम्हें दिया है. हो सके तो इसे एक बार जरूर पढ़ लेना. रात हो चुकी थी.
सारे लोग जा चुके थे. प्रिया ने खत निकाला और पढ़ने लगी. उसमें सबसे पहले लिखा था, मेरी प्यारी बेटी प्रिया मुझे मालूम है तुम मुझसे नाराज हो पर अपने पापा को माफ कर देना. मैं जानता हूं तुम्हें मैंने घर से निकाला था. तुम्हारे पास रहने की जगह नहीं थी. तुम दर-दर की ठोकरे खा रही थी, पर मैं भी बहुत उदास था तुम्हें कैसे बताऊं. याद है जब तुम 5 साल की थी तब तुम्हारी मां हमें छोड़कर दुनिया से चली गयी थी. तब तुम कितना रोती थी. मेरे बिना सोती नहीं थी. रातों को उठ कर तुम रोती थी.तब मैं भी सारी रात तुम्हारे साथ जगता था. हाईस्कूल की परीक्षा की तैयारी में तुम रात भर पढ़ती थी. मैं सारी रात तुम्हें चाय बना कर देता था. तुम्हारी खुशी में मैं बाधा नहीं बनना चाहता था, लेकिन मैं तुम्हारा पापा हूं.
मैंने उस लड़के के बारे में पता किया तो मालूम हुआ कि उसने ना जाने पैसों के लिए कितनी लड़कियों को धोखा दिया था. मैं इसलिए मना करता था, लेकिन फिर भी तुमने उसी से शादी कर ली. उस वक्त प्यार में तुम अंधी थी. मेरे कितने अरमान थे कि तुम्हें डोली में बैठाऊं. चांद- सितारों की तरह सजाऊं . ऐसी धूमधाम से शादी करे कि लोग बोल पड़े कि हां उन्होंने अपनी बेटी की शादी की थी. तुम पर बड़ा नाज था बेटी, जो तुमने तोड़ दिया. तुम्हारी मां के गहने और तुम्हारे लिए मैंने जो गहने खरीदे थे सब अलमारी में हैं.
घर,जमीन व बैंक में जमा पैसे सब तुम्हारे और तुम्हारे बच्चों के नाम पर कर दिया हूं. उसे निकाल लेना. मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं था. तुम्हारा पापा था. काश तुम ने मुझे समझा होता. नाटक के कलाकारों में महेश चौधरी,मोनिका, सौरभ, रजनीश, छोटू, श्रवण, रंजीत, प्रकाश, अंजनी, पूजा, प्रियंका,राजमती, अमन,संजय,पवन कुमार दीपक ने काफी बेहतरीन अभिनय किया.
