पीयू छात्र संघ चुनाव. कैंपस में नेताओं की चहलकदमी हुई तेज, छुट्टी के दिन भी प्रचार रहा जारी
समीकरण बनाने में लगे छात्र संगठन
पटना : पटना विश्वविद्यालय के द्वारा अधिसूचना जारी की गयी है कि विवि परिसर व सभी अंगीभूत विभागों, कॉलेजों व संस्थान के परिसरों में विवि छात्र संघ चुनाव तक किसी भी प्रकार के हड़ताल, धरना, प्रदर्शन, घेराव व अनशन पर बैठना निषेध है.
ऐसा किये जाने पर उक्त संघ या संगठन पर विवि प्रशासन के द्वारा कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जायेगी. यह अधिसूचना वेबसाइट पर भी जारी कर दी गयी है. इसके अतिरिक्त विवि छात्र संघ नियमावली के अनुसार किसी भी तरह के वॉल पेंटिंग पर रोक है. वहीं प्रिंटेट पोस्टर भी की अनुमति नहीं है. सिर्फ हाथ से बने पोस्टर का ही प्रयोग छात्र कर सकते हैं. खर्च का लिमिट सिर्फ पांच हजार रुपये है.
कैंपस में नेताओं की चहल-कदमी तेज हो गयी है. छुट्टी के दिन भी पूरे दिन छात्र नेताओं का हॉस्टलों में प्रचार अभियान जारी था. हालांकि अभी नॉमिनेशन फॉर्म गुरुवार से मिलेंगे और 24 नवंबर से नॉमिनेशन शुरू होगा.
लेकिन अभी से ही जो जिस पोस्ट पर लड़ने की सोच रहा है उसके अनुसार प्रचार में लग गया है. पोस्टर जारी होने लगे हैं. वहीं समीकरण बनाने में भी छात्र नेता तेजी से जुट गये हैं. वोटरों को लुभाने के लिए छात्र तरह-तरह के वादे भी कर रहे हैं. अभी उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार की जा रही है जल्द ही सभी संगठन उसे जारी करेंगे.
छात्र विंग अलग लड़ेंगे चुनाव : छात्र लोजपा, छात्र जदयू और एबीवीपी आदि छात्र संगठनों की मुख्य पार्टियां सरकार में एक दूसरे को समर्थन कर रही हैं. लेकिन पीयू के छात्र चुनाव में तीनों संगठनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने की घोषणा की है.
छात्र संघ के पिछले चुनाव में छात्र जदयू कुछ खास नहीं कर पायी थी लेकिन छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष के जदयू में जाने से यह कयास लगाया जाने लगा है कि जदयू इस छात्र संघ चुनाव को गंभीरता से लेने जा रहा है. छात्र संघ के पिछले चुनाव में अध्यक्ष चुने गये निर्दलीय उम्मीदवार दिव्यांशु भारद्वाज ने भी यह बात कही है कि चूंकि वे इसी चुनाव से उभर कर राजनीति में आये हैं वे अपने अनुभव का पूरा उपयोग छात्र जदयू को इस चुनाव में जिताने में लगायेंगे और सेंट्रल पैनल की पांचों सीटों पर जीत के साथ परचम लहरायेंगे.
दो विरोधी एक संगठन के लिए प्रचार करते नजर आ सकते हैं : इधर छात्र जदयू को छोड़ पिछले वर्ष निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले मनीष यादव को अब जदयू सलाहकार समिति का सदस्य बनाये जाने से मनीष व दिव्यांशु भारद्वाज दो विरोधी एक ही संगठन छात्र जदयू के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करते नजर आ सकते हैं.
अब दोनों एक ही पार्टी में होने तथा दोनों ही पूर्व छात्र संघ के उम्मीदवार होने के कारण अपने अनुभव से छात्र जदयू को जिताने में लगेंगे. यह भी कहा जा रहा है कि अभी हाल में जदयू में शामिल हुए प्रशांत किशोर स्वयं छात्र विंग को नये सिरे से गठित और मजबूत करना चाहते हैं.
पटना. छात्र संघ चुनाव की तैयारी में लगे छात्र संगठनों में खुशी है. इस खुशी में कई परेशानियां भी आ रही है. अच्छे प्रत्याशियों की तलाश अभी भी कई संगठन तलाश रहे हैं. संगठन सेंट्रल पैनल पर ऐसे उम्मीदवार को चाह रहे हैं जिसमें संगठन के साथ-साथ चेहरा पर भी वोट मिले. प्रत्याशियों का खुद का वोट बैंक भी संगठन तलाश रहे हैं.
विभिन्न छात्र संगठन अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं. विभिन्न छात्र संगठनों ने कहा कि छात्र संगठन बिल्कुल तैयार है.एआईएसएफ, आईसा, एबीवीपी, छात्र जदयू, एनएसयूआई, छात्र राजद, जन अधिकार छात्र परिषद, छात्र लोजपा, जेएसडी, छात्र समाजवादी पार्टी, रालोसपा, एआईडीएसओ, छात्र युवा संघर्ष समिति के साथ अन्य संगठनों ने कहा कि बेहतर उम्मीदवार की तलाश जारी है.
सभी संगठन अपनी दावेदारी में जुटे : सभी संगठन अपनी दावेदारी मजबूती से पेश करने में जुटे हैं. वहीं कुछ संगठन के सदस्यों ने कहा कि अभी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, महासचिव, कोषाध्यक्ष के प्रमुख दावेदार की भी खोज संगठन कर रही है. एबीवीपी पिछले चुनाव की तरह की प्रत्याशियों की तलाश कर रही है. सभी छात्र संगठन अपने स्तर से तैयारी में जुट गये हैं.
पटना : छात्र संघ चुनाव की घोषणा होते ही महिला कॉलेजों में भी अब चुनावी सरगर्मी तेज हो गयी है. संभावित उम्मीदवार छात्राओं को चुनाव को लेकर जागरूक करने में जुट चुके हैं. छात्र जदयू, एआईएसएफ, एनएसयूआई, एबीवीपी, जन अधिकार पार्टी, लोजपा के छात्र दल से जुड़े कार्यकर्ता प्रचार-प्रसार में जुट गये हैं. मगध महिला कॉलेज व पटना वीमेंस कॉलेज में चुनाव को लेकर एक अलग माहौल बना हुआ है.
पिछले साल हुए चुनाव की मानें, तो बस दूर के ढोल सुहावन तक ही रह गया. इस बार के चुनाव से सभी को काफी उम्मीदें है. पटना वीमेंस कॉलेज में फिलहाल छात्राएं चुनाव की बात कर रही है. अभी तक चुनाव को लेकर कुछ खास तैयारी नहीं देखने को मिल रही हैं. पिछली बार चुनाव के समय परीक्षा होने की वजह से छात्राओं की भागीदारी कम देखने को मिली थी.
