पटना : पीपीपी मॉडल के जरिये अब घर बनाने में आयेगी तेजी, पांच वर्षों में 3.5 लाख यूनिट आवास के निर्माण का लक्ष्य

स्लम बस्ती व किफायती आवास परियोजना का मामला पटना : हाउस फॉर ऑल के तहत मलिन बस्ती (स्लम) पुनर्विकास एवं किफायती आवास के पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड से निर्माण में अब तेजी आयेगी. इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने वर्ल्ड बैंक की सहयोगी संस्था इंटरनेशनल फिनांस कॉरपोरेशन (आईएफसी) व बिहार आधारभूत संरचना […]

स्लम बस्ती व किफायती आवास परियोजना का मामला
पटना : हाउस फॉर ऑल के तहत मलिन बस्ती (स्लम) पुनर्विकास एवं किफायती आवास के पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड से निर्माण में अब तेजी आयेगी. इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने वर्ल्ड बैंक की सहयोगी संस्था इंटरनेशनल फिनांस कॉरपोरेशन (आईएफसी) व बिहार आधारभूत संरचना प्राधिकार (आईडीए) के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है.
समझौते के तहत आईएफसी इस परियोजना का ट्रांजेक्शन एडवाइजर होगा, जो कि पीपीपी मोड में किफायती आवास निर्माण को लेकर राज्य सरकार को तकनीकी व वित्तीय सलाह तथा राशि उपलब्ध करायेगा. परियोजनाओं के माध्यम से अगले पांच वर्षों में करीब 3.5 लाख यूनिट आवास के निर्माण का लक्ष्य है.
बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर तैयार होगा डेवलपमेंट मॉडल
एकरारनामा के तहत ट्रांजेक्शन एडवाइजर आईएफसी किफायती आवास परियोजनाओं के लिए भूखंडों के चयन में सहायता करने के साथ ही इसके औचित्य (प्री-फिजेबिलिटी) और वित्तीय व्यवहार्यता (फिनांसियल वाइबलिटी) का अध्ययन करेगी. साथ ही इनके द्वारा राज्य तथा केंद्र सरकारों के संबंधित नीति, मार्गदर्शिका तथा बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधानों का ध्यान रखते हुए डेवलपमेंट मॉडल तैयार किया जायेगा.
आईएफसी पर ही परियोजनाओं के आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) तैयार करने के साथ ही पीपीपी मोड में पूर्ण निविदा प्रबंधन आदि करने का दायित्व रहेगा. एकरारनामा के तहत ट्रांजेक्शन एडवाइजर अधिकारी-कर्मचारी के क्षमता वर्द्धन को लेकर देश-विदेश में प्रशिक्षण, कार्यशाला, बैठक, सम्मेलन आदि का आयोजन करेगा, जिसके लिए राज्य का कोई आर्थिक दायित्व नहीं होगा.
आर्थिक कमजोर व निम्न आय वर्ग के लिए होंगे आवास
हाउस फॉर ऑल के तहत सरकारी भूमि, आवास बोर्ड व नगर निकायों की जमीन पर पीपीपी मोड से आर्थिक रूप से कमजोर (इडब्लूएस) व निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लोगों के लिए आवास का निर्माण होना है.
इस मॉडल के अधीन परियोजनाओं के लिए ली जाने वाली सरकारी भूमि परियोजना विकास एजेंसी को नि:शुल्क और पूर्ण स्वामित्व पर दी जायेगी. परियोजना भूमि को दो भाग अर्थात किफायती आवास क्षेत्र और डेवलपर का क्षेत्र में बांटा जायेगा. एजेंसी यह सुनिश्चित करेगी कि किफायती आवास क्षेत्र में ईडब्लूएस व एलआईजी के लिए अधिक से अधिक आवास बने, वहीं डेवलपर के क्षेत्र के लिए गगनचुंबी भवनों की अनुमति होगी.
कमजोर वर्ग के लिए होंगे 75 फीसदी आवास
नियम के मुताबिक ऐसी परियोजनाओं के लिए कम से कम 4000 वर्गमीटर का क्षेत्रफल होना अनिवार्य है. हर परियोजना में तीन लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए कम से कम 75 फीसदी, एक से तीन लाख आबादी वाले शहर में 60 फीसदी और उससे कम जनसंख्या वाले शहर में 50 फीसदी आवास आर्थिक कमजोर व कम आय वर्ग के लिए बनाना अनिवार्य है. नियम को सख्ती से लागू कराया जायेगा. इसमें कोताही नहीं होगी.
एजेंसी के जुड़ने से मदद मिलेगी
किफायती आवास व मलिन बस्ती विकास योजना में अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के बतौर ट्रांजेक्शन एडवाइजर जुड़ने से काफी मदद मिलेगी. इसके माध्यम से तकनीकी व वित्तीय सहायता मिलेगी ही, निर्धारित समय में लक्ष्य पाने में भी आसानी होगी.
—चैतन्य प्रसाद, प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग

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