पटना : संविदाकर्मियों को सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर सुविधाएं देने को लेकर राज्य सरकार ने पूरी गंभीरता दिखायी है. इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने संविदाकर्मियों को सौगात दे भी दी है. इसी क्रम में साफ हुआ है कि संविदाकर्मियों के मानदेय निर्धारण में अब किसी भी स्तर से उदासीनता नहीं बरती जायेगी.
सरकारी ने ऐसी व्यवस्था की है कि किसी भी तरह से हीला-हवाली संभव नहीं है. उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसा के बाद सरकार ने विकास आयुक्त की अगुवाई में कमेटी गठन को मंजूरी दी है. इस कमेटी में सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग के प्रधान सचिव/सचिव सदस्य की भूमिका में होंगे. इससे साफ है कि मानदेय निर्धारण में न लेटलतीफी होगी, न ही किसी और वजह से यह मामला लटकेगा.
पांच लाख से अधिक कर्मियों को मिलेगा लाभ
नीतीश सरकार के फैसले से सीधे तौर पर पांच लाख से अधिक संविदाकर्मियों को लाभ मिलेगा. दरअसल, संविदकर्मियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था. इस समिति का अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक चौधरी को बनाया गया था. कई सालों की मेहनत के बाद सभी विभागों से ब्योरा इकट्ठा किया गया.
इसके बाद सभी विभागों में कार्यरत संविदाकर्मियों की सुविधाओं सहित अन्य बिंदुओं का अध्ययन किया गया. इसके बाद इसी साल अगस्त में समिति ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में संविदाकर्मियों को लेकर तमाम अनुशंसाएं की गयी हैं. अधिकतर अनुशंसा पर सरकार ने मुहर लगा दी है.
इसी रिपोर्ट में समिति ने अनुशंसा की थी कि संविदाकर्मियों के मानदेय निर्धारण के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाये. इसमें सदस्य के तौर पर सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग के प्रधान सचिव/सचिव को रखा जाये. इस अनुशंसा को सरकार ने मंजूरी दी है. इसके अलावा समिति ने यह भी कहा है कि निर्धारित पारिश्रमिक ‘न्यूनतम मजदूरी’ से कम न हो.
