पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में पेयजल की समस्या को लेकर पीएचईडी को निर्देश दिया कि प्रखंड स्तर तक इसका सर्वे कराये. उन्होंने पीएचईडी के सचिव को निर्देश दिया कि जहां पेयजल की समस्या है, उस क्षेत्र में कार्यरत कनीय अभियंता, सहायक अभियंता के माध्यम से प्रखंडवार सर्वे करा लें. साथ ही अगली बैठक में वस्तुस्थिति से अवगत कराएं.
उन्होंने हर घर नल का जल योजना के साथ चापाकल की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का भी निर्देश दिया. बेकार पड़े चापाकलों को हटाने और जहां जरूरत हो, वहां पर नये चापाकल लगाने का निर्देश दिया. सार्वजनिक जगहों पर चापाकल लगाने से ज्यादा परिवार इसका लाभ उठा पायेंगेे. पशुओं के पेयजल और उनके रहने के लिए जो व्यवस्था बनाने के निर्देश पहले दिये गये थे, उनके संबंध में तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया. मुख्यमंत्री बुधवार को 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में सुखाड़ से संबंधित समीक्षा बैठक कर रहे थे.
बैठक में कम वर्षा होने के कारण फसल की वर्तमान स्थिति, कृषि विभाग की तैयारियों, विभिन्न जिलों में भू-जल स्तर की स्थिति की समीक्षा की गयी. समीक्षा के क्रम में पीएचईडी के सचिव ने छह वर्ष पहले सितंबर माह और इस वर्ष इसी माह में भू-जल स्तर की तुलनात्मक जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे जिला कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी के माध्यम से जमीनी स्तर पर सभी चीजों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर लें. स्थिति के सही आकलन होने से अगली बैठक में किसानों के हित में निर्णय लिया जा सकेगा.
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान के प्रतिनिधि ने बताया कि अगले दो दिनों में पूर्व बिहार और उत्तर-पूर्व बिहार में बारिश हो सकती है, क्योंकि ईस्टर्ली विंड स्पायरल–वे बिहार की तरफ बढ़ रहा है.
बैठक में मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद, कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार, ऊर्जा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार व सचिव मनीष कुमार वर्मा, पीएचईडी के सचिव जितेंद्र श्रीवास्तव, निदेशक कृषि आदेश तितरमारे, सीएम के ओएसडी गोपाल सिंह सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे.
सूखी फसलों की कटाई नहीं करें, फसल सहायता योजना का लाभ मिलने में होगी सहूलियत
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोपनी होने के बाद जो फसलें सूख रही हैं, उनकी किसान कटाई न करें. इससे सर्वेक्षण में पता चल सकेगा और किसानों को फसल सहायता योजना का लाभ मिलने में सहूलियत होगी. किसानों को तत्काल आपदा प्रबंधन के तहत मिलने वाली सहायता के संबंध में विभाग को तैयारी करने का भी निर्देश दिया गया. सभी डाटा कलेक्शन 15 अक्तूबर तक तैयार करने का निर्देश दिया गया. इससे उसकी समीक्षा कर किसानों को आपदा प्रबंधन संबंधी सहायता एवं फसल सहायता योजना के संबंध में निर्णय लिया जा सकेगा.
