पटना : 20 किमी की गति से रेंग रहे वाहन, फिर भी नौ माह में 98 मौतें

शहर के तीन ट्रैफिक थानों में 221 सड़क हादसे किये गये हैं दर्ज अनुपम कुमार पटना : स्लो ट्रैफिक पटना की एक बड़ी समस्या रही है अौर विभिन्न यातायात अवरोधकों के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर भी महज 15-20 किमी प्रतिघंटे की गति से गाड़ियां रेंगती हैं. इसके बावजूद महज साढ़े आठ महीने में […]

शहर के तीन ट्रैफिक थानों में 221 सड़क हादसे किये गये हैं दर्ज
अनुपम कुमार
पटना : स्लो ट्रैफिक पटना की एक बड़ी समस्या रही है अौर विभिन्न यातायात अवरोधकों के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर भी महज 15-20 किमी प्रतिघंटे की गति से गाड़ियां रेंगती हैं. इसके बावजूद महज साढ़े आठ महीने में 221 दुर्घटना व 98 मौत का आंकड़ा हैरान करने वाला है. धीमे दौड़ रहे वाहनों की चपेट में पैदल चलने वाले व बाइक सवार के बड़ी संख्या में आने की वजह जानने के लिए प्रभात खबर की टीम ने शहर के तीन ट्रैफिक थानों गांधी मैदान थाना, बाईपास थाना और सगुना मोड़ थाने में दर्ज प्रमुख दुर्घटनाओं की केस स्टडी व मौत के वजह की समीक्षा की तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी.
हो रही दुर्घटना
शहर के कई चौराहे, तिराहे और ट्रैफिक प्वाइंट्स ऐसे हैं, जहां दो सड़क एक-दूसरे से इस तरह मिलते हैं कि उन पर आने वाले वाहन बिल्कुल नजदीक आने से पहले तक एक-दूसरे को नहीं दिखाई देते हैं. दिन के समय गति धीमी होने की वजह से अंतिम क्षणों में भी एक-दूसरे को देखने पर ड्राइवर वाहन को नियंत्रित कर लेते हैं और एक-दूसरे को बचाते हुए बगल से निकल जाते हैं.
लेकिन देर रात जब खाली सड़क देख कर वाहन की रफ्तार तेज होती है, आखिरी क्षणों में उसे नियंत्रित करना और दुर्घटना को रोकना मुश्किल होता है.
सड़क पर जमा बालू खतरनाक
सड़क पर जमे बालू व बजरी भी खतरनाक हैं. बाईपास पर कई जानलेवा दुर्घटनाएं इसी के कारण हुई हैं. सड़क की सफाई नहीं होने के कारण उस पर गिरने वाले धूल कण और बालू आने-जाने वाले वाहनों के दबाव से उत्पन्न हवा के झटके से दायें-बायें होकर सड़क के किनारे ही लग जाते हैं.
बड़े बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के पीछे से तेज हॉर्न देने पर के ज्यों ही बाइक सवार सड़क के किनारे जाने के लिए बाइक को हल्का घुमाता है, बजरी पर चक्का पड़ते साथ बाइक फिसल जाती है और बाइक चालक व सवार पीछे से तेज गति से आते भारी वाहन के सामने अचानक इस तरह गिरता है कि उसके लिए भी बाइक सवार को चक्के के नीचे आने से रोकना मुश्किल भरा होता है.
रैश ड्राइविंग जानलेवा दुर्घटना की बड़ी वजह : कम गति में वाहनों के दौड़ने के बावजूद दुर्घटनाओं के ऊंचे दर की एक बड़ी वजह रैश ड्राइविंग है. कम उम्र के युवा अपने ड्राइविंग स्किल और कंट्रोल क्षमता का लोहा मनवाने के लिए बेतरतीब वाहन चलाते हैं जबकि कई उम्रदराज लोग रैश ड्राइविंग इसलिए करते हैं क्योकि ट्रैफिक के सामान्य दिशानिर्देश भी उन्हें नहीं मालूम. इसके लिए डीटीओ ऑफिस भी दोषी है, जहां से ऐसे लोगों को भी डीएल मिल गया है जो इसकी समुचित योग्यता नहीं रखते.
जेब्रा जंप आैर पैदल चलने वालों की मनमानी भी दोषी : पैदल चलने वालों की मनमानी भी बढ़ती सड़क दुर्घटना और उससे होने वाली मौत की वजह है. लोग व्यस्त सड़कों को पार करने के लिए भी जेब्रा क्रॉसिंग का इस्तेमाल नहीं करके बल्कि कहीं भी सड़क पार करने का प्रयास करते हैं. वाहन चालकों में भी जेब्रा जंप करने की प्रवृति है, जिसके कारण लोगों को जेब्रा क्रॉसिंग भी आने जाने के पूरी तरह महफूज नहीं लगता है. मनमाने ढंग से सड़क पार करने की वजह से कई बार बचाते-बचाते भी सिटी बस व अन्य भारी वाहनों की चपेट में लोग आ जाते हैं.
एक्सपर्ट व्यू
दुर्घटनाओं में अधिक हो रही बाइक वालों की मौत
शहर में होने वाली दुर्घटनाओं में देखा गया है कि बाइक वाले की मौत अधिक हो रही है. इसकी वजह 90 फीसदी मामलों में उनकी अपनी गलती होती है जबकि 10 फीसदी मामलों में ऐसा बड़ी गाड़ी वाले की गलती से होता है. बाइक चालकों के द्वारा दूसरे वाहनों को बेतरतीबी से ओवरटेक करने का प्रयास और जहां यू-टर्न की गुंजाइश नहीं, ऐसे स्थलों पर भी यू-टर्न करना दुर्घटनाओं की बड़ी वजह है.
बाइक चलाते समय कान में मोबाइल लगाये रखना या इयरफोन पर बातों में मशगूल होना भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह है. ऐसे में लोग किसी पैदल चल रहे आदमी, औरत या जानवर को धक्का मार देते ंहै, जिससे कई बार उनकी जान पर बन जाती है. ट्रक और ट्रैक्टर की बेतरतीब चाल भी वजह है.
– शब्बीर अहमद, पूर्व ट्रैफिक
डीएसपी सह सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ

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