पटना : पटना शहर में इस समय 38 हजार ऑटो रिक्शा चल रहे हैं. इनमें 18 हजार ऑटो रिक्शा का पुलिस वेरीफिकेशन हुआ है जबकि 20 हजार ऑटो रिक्शा बिना पुलिस वेरीफिकेशन के चल रहे हैं. ऐसे में यात्रियों के साथ ऑटो रिक्शा चालकों के द्वारा या उनकी मिलीभगत से किसी प्रकार की वारदात होने की स्थिति में ऑटो रिक्शा का पता लगाना मुश्किल होगा.
पुलिस वेरीफिकेशन से ऑटो रिक्शा के मालिक का चरित्र सत्यापन हो जाता है. किसी प्रकार का आपराधिक इतिहास होने पर पुलिस वेरीफिकेशन कोड देने से मना कर देती है और वह डीटीओ को ऐसे वाहन स्वामियों का परमिट रद्द करने तक की अनुसंशा कर सकती है. इससे संदेहास्पद प्रवृति के व्यक्तियों को सड़क पर ऑटो चलाने से रोका जा सकता है और वारदात की आशंका को कम किया जा सकता है.
ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो भी चल रहे शहर में
शहर की सड़कों पर पटना ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो भी चल रहे हैं. बिना शहरी परमिट के चल रहे इन ऑटो से पटना शहर में वारदात होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है. इन ऑटो का पुलिस वेरीफिकेशन और भी जरूरी है. तीन-चार वर्ष पहले पुलिस वेरीफिकेशन करने की प्रक्रिया जोर-शोर से शुरू हुई थी, लेकिन उस समय मौजूद 37 हजार ऑटो में लगभग आधे (18 हजार) का ही पुलिस वेरीफिकेशन हो सका था कि यह प्रक्रिया बंद हो गयी. पुलिस वेरीफिकेशन में सही पाये जाने के बाद ऑटो को एक वेरीफिकेशन कोड दिया जाता है, जो ऑटो के पीछे लिखवाना जरूरी माना जाता है. शहर के लगभग आधे ऑटो रिक्शा बिना इस वेरीफिकेशन कोड के दिखते हैं.
