पटना : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर दूसरे दिन ओपीडी में नहीं दिखा. हालांकि इमरजेंसी सेवाएं और ऑपरेशन थिएटर बुरी तरह प्रभावित हुए. 30 से अधिक ऑपरेशन नहीं हुए. इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों में से करीब 30 फीसदी मरीज बेड छोड़ भाग खड़े हुए. दिलचस्प बात यह है कि आम दिनों की तरह मंगलवार को भी मरीज इलाज कराने पहुंचे. ओपीडी का आंकड़ा 2614 रहा, जो सामान्य दिनों जितना ही है.
प्राइवेट हॉस्पिटलों की ओर भागे मरीज : जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से गंभीर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ गया. इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की संख्या कम होने की वजह से मरीजों का सही मायने में इलाज नहीं हो पाया. इससे परेशान होकर 30 प्रतिशत मरीजों ने प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर लिया. हड़ताल के दूसरे दिन इमरजेंसी वार्ड पूरा खाली दिखा. यहां तक कि आम दिनों में बेड फुल होने के साथ ही जमीन पर मरीज इलाज कराते रहते हैं, लेकिन हड़ताल की वजह से एक भी मरीज जमीन पर नहीं दिखा.
नहीं हो सका एक भी ऑपरेशन: जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे अधिक असर ऑपरेशन थिएटर पर पड़ा. हड़ताल की वजह से एक भी ऑपरेशन नहीं हो पाया. अस्पताल प्रशासन की मानें, तो मंगलवार को 30 बड़े व छोटे ऑपरेशन होने थे.
लेकिन सीनियर डॉक्टर जूनियर डॉक्टरों के अभाव में ऑपरेशन करने के लिए राजी नहीं हुए. नतीजा सभी ऑपरेशन टाल दिये गये. इससे उन मरीजों को अधिक परेशानी हुई, जो गंभीर थे और लंबे समय से ऑपरेशन का इंतजार कर रहे थे. उनको अगले दिन का नंबर दिया गया है.
50 में 25 डॉक्टर ही पहुंचे: हड़ताल और मरीजों की परेशानियों को देखते हुए मंगलवार को बाहर से 50 डॉक्टरों को बुलाने के लिए सिविल सर्जन से मदद मांगी गयी. लेकिन सिर्फ 25 डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया. हड़ताल की पहली रात को एक भी डॉक्टर ज्वाइन नहीं कर सके थे. ऐसे में रात को मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ गया.
इमरजेंसी वार्ड में कम डॉक्टर होने से भर्ती मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. इसको देखते हुए अधिकांश मरीज आधी रात को दूसरे अस्पताल में चले गये. जो मरीज लाचार और मजबूर थे वही इलाज करा रहे हैं.
सतीश कुमार, मरीज का भाई
मेरे पिता जी को मंगलवार को ऑपरेशन का डेट दिया गया था. ओटी नंबर तीन में ऑपरेशन होना था. जरूरत की दवाएं आदि खरीद ली गयी थी. सुबह आठ बजे डॉक्टर बोले कि हड़ताल की वजह से ऑपरेशन नहीं हो रहा, एक दो दिन में ऑपरेशन कर दिया जायेगा.
मनीष कुमार, मरीज का बेटा
एनएमसीएच में बढ़ी मरीजों की भीड़
पटना सिटी : एनएमसीएच के पंजीयन काउंटर पर मंगलवार को उपचार कराने आये मरीजों की अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में अफरा-तफरी मची रही. दरअसल पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण यहां मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. सुबह आठ बजे से पंजीयन काउंटर के शेड के बाहर तक कतार लगी थी. कर्मियों ने बताया कि मंगलवार को ओपीडी में लगभग 2850 से अधिक मरीज का उपचार किया गया. इसमें नये 2150 व पुराने 700 मरीज उपचार कराने आये थे. कुछ इसी तरह की स्थिति इमरजेंसी में भी बनी है. यहां भी बेड की कमी होने की स्थिति में मरीज को जमीन पर बेड डालकर उपचार कराया जा रहा है.
डॉक्टरों ने 24 घंटे का दिया अल्टीमेटम
पीएमसीएच में हड़ताल पर गये डॉक्टरों का समर्थन एनएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को बैठक कर की. इसमें तय किया गया कि 24 घंटे के अंदर पुलिस प्रशासन सुरक्षा के इंतजाम व आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है, तब उनके समर्थन में हड़ताल पर चले जायेंगे. इससे पहले जूनियर डॉक्टरों का शिष्टमंडल अस्पताल के अधीक्षक डॉ चंद्रशेखर से मिला और सुरक्षा को लेकर लंबित मांगों को रखा.
प्रिंसिपल कार्यालय में हड़ताल खत्म करने को चली दो बार बैठक, वार्ता विफल
क्यों हुई हड़ताल : पटना खगौल के रहने वाले 12 साल के आदित्य राज को रविवार की रात सांप काट दिया. परिजनों ने पीएमसीएच में इलाज कराने के लिए लेकर आये, हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने शिशु रोग विभाग में भर्ती कर दिया. सुबह में मरीज की हालत में सुधार आने लगा.
आदित्य को डिस्चार्ज कर परिजन प्राइवेट अस्पताल में ले जाना चाहते थे, लेकिन मरीज की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने डिस्चार्ज करने से मना कर दिया. डॉक्टरों का कहना है कि खुद के मर्जी से ले जाने के लिए आदेश जारी कर दिया गया था. लेकिन मरीज के परिजन डिस्चार्ज स्लिप के साथ ही पक्की बीएसटी की मांग कर रहे थे. लेकिन डॉक्टरों ने देने से मना किया तो परिजनों ने डॉक्टर के साथ मारपीट की.
पटना मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त करने के लिए मंगलवार को दिन भर मान मनौअल का दौर जारी रहा. हड़ताल खत्म हो इसके लिए पीएमसीएच के प्रिंसिपल कार्यालय में दो बार बैठक आयोजित की गयी. इसमें प्रिंसिपल, अधीक्षक व अस्पताल के सभी विभाग के विभागाध्यक्ष सहित जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ शंकर भारतीय के अलावा एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद थे, लेकिन वार्ता विफल हो गयी. पीएमसीएच के अधीक्षक ने कहा कि बुधवार को उम्मीद है कि हड़ताल समाप्त हो जायेगी. क्योंकि जूनियर डॉक्टरों की मांग लगभग मान ली गयी है. जेडीए के अध्यक्ष डॉ शंकर भारतीय ने कहा कि सभी मांगें पूरी नहीं होंगी तो हड़ताल जारी रहेगा.
इलाज के लिए तड़पता रहा खिलाड़ी आईजीआईएमएस में भर्ती
पीएमसीएच में हड़ताल की वजह से एक खिलाड़ी
को समय पर इलाज नहीं मिल पाया. खिलाड़ी पीएमसीएच से लेकर राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल का चक्कर लगाता रह गया. अंत में उसको इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया. जानकारी के अनुसार पाटलिपुत्रा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही तरंग प्रतियोगिता में लॉन्ग जंप के दौरान खिलाड़ी रवीश कुमार के बांये हाथ में गंभीर चोट लगी.
दर्द से पीड़ित रवीश को तुरंत पास के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद मरीज को राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल में भर्ती ले गया लेकिन गंभीर हालत देखते हुए उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. फिर खिलाड़ी को पीएमसीएच ले जाया गया जहां हड़ताल की वजह से वह भर्ती नहीं हो सका. अंत में दोपहर दो बजे आईजीआईएमएस में भर्ती हुआ. रवीश कुमार तरंग खेल प्रतियोगिता 2018 में शामिल होने के लिए पटना आया है.
हाथ की नस कटी, आज होगा ऑपरेशन: आईजीआईएमएस के इमरजेंसी के बेड नंबर 5 पर भर्ती रविश कुमार का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के हाथ की नस कट गयी है. इससे उसका काफी ब्लड भी गिरा. हालत गंभीर देखते हुए इमरजेंसी में भर्ती किया गया है. ऑपरेशन बुधवार को किया जायेगा. उसको देखने के लिए कई खिलाड़ी अस्पताल पहुंचे.
