पटना : पटना मेट्रो परियोजना के सफल कार्यान्वयन एवं संचालन को लेकर पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन एसपीवी (स्पेशल पर्पस व्हेकिल) के गठन को कैबिनेट की मंजूरी मिल गयी है.
एसपीवी इक्विटी-डेब्ट मॉडल पर राज्य एवं केंद्र सरकार के साथ जीका या एडीबी से ऋण प्राप्त कर मेट्रो परियोजना का संचालन करेगी. भविष्य में पटना मेट्रो रेल प्रोजेक्ट पर भारत सरकार के अनुमोदन के बाद मेट्रो रेल पॉलिसी 2017 के अनुसार ज्वाइंट एसपीवी का गठन किया जायेगा, जिसमें चेयरमैन भारत सरकार के जबकि एमडी बिहार सरकार के नॉमिनी होंगे.
अनुमोदन नहीं मिलने तक लखनऊ मेट्रो एवं नागपुर मेट्रो की तर्ज पर अंतरिम व्यवस्था के तहत बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन व एमडी के एक-एक पद सहित निदेशक के पांच पदों पर बिहार सरकार के प्रतिनिधि नामित रहेंगे.
बिहार सरकार करेगी एमडी मनोनीत: विभाग के मुताबिक फिलहाल नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, सचिव या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के चेयरमैन बनेंगे. एमडी का मनोनयन बिहार सरकार करेगी. निदेशक के पांच पदों पर नगर विकास एवं आवास विभाग, वित्त विभाग, परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग एवं ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव, सचिव या प्राधिकृत प्रतिनिधि नामित होंगे.
केंद्र की मंजूरी के बाद बदल जायेगा चेयरमैन : पटना मेट्रो रेल प्रोजेक्ट बिहार कैबिनेट की मंजूरी के बाद भारत सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. पुनर्गठित एसपीवी में एमडी बिहार सरकार का होगा. चेयरमैन भारत सरकार का बनेगा. बिहार सरकार के पांच निदेशकों के साथ भारत सरकार के पांच प्रतिनिधि जोड़े जायेंगे.
दो हजार करोड़ रुपये की कंपनी
पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 2000 करोड़ रुपये अधिकृत पूंजी की कंपनी होगी. इसके पांच हजार शेयर सात शेयरधारकों के पास रहेंगे. इनमें सबसे अधिक 4940 शेयर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, सचिव या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि के पास जबकि बाकी 10-10 शेयर वित्त विभाग, परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, ऊर्जा विभाग, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव, सचिव तथा प्रमंडलीय आयुक्त या उनके प्रतिनिधि के पास रहेंगे.
पटना : दिखेगी चंपारण सत्याग्रह की स्मृतियां
बापू टावर के निर्माण पर खर्च होंगे 84़ 49 करोड़,दो अक्तूबर को रखी जायेगी आधारशिला
पटना : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह की स्मृति में गर्दनीबाग में 120 फुट ऊंचा बापू टावर बनेगा. इसमें बापू से जुड़ी स्मृतियाें को संजोया जायेगा. बापू टावर के निर्माण पर 84़ 49 करोड़ खर्च होंगे. कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है. बापू टावर के निर्माण की आधारशिला दो अक्तूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रखेंगे. लगभग डेढ़ साल में बापू टावर के निर्माण होने की संभावना है.
8947 वर्गमीटर में बिल्डअप एरिया होगा. बापू टावर के लिए तैयार डिजाइन को फाइनल माना जा रहा है. जानकारों के अनुसार यह राज्य का सबसे ऊंचा टावर होगा. पूरे देश में यह स्ट्रक्चर अपने किस्म की पहली होगी. बापू टावर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दूर से ही बापू की झलक दिखेगी. पूरे परिसर की लैंड स्केपिंग की जायेगी. पांच एकड़ में बनने वाला बापू टावर छह मंजिला होगा. इसमें हर मंजिल पर बापू के चंपारण सत्याग्रह से जुड़ी स्मृतियों के दर्शन होंगे. बिहार दिवस समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में विश्वस्तरीय बापू टावर का निर्माण किये जाने की घोषणा की थी.
गर्दनीबाग स्टेडियम के पास निर्माण
बापू टावर का निर्माण गर्दनीबाग स्थित स्टेडियम के समीप होगा. पटना-खगौल रोड से सटे गर्दनीबाग स्टेडियम के पास बापू टावर के लिए पांच एकड़ जमीन की व्यवस्था की गयी है. पहले बापू टावर का निर्माण सदाकत आश्रम के समीप बिहार विद्यापीठ परिसर में कराने का निर्णय हुआ था. लेकिन, विद्यापीठ परिसर में जमीन नहीं मिल पाने की वजह से निर्णय में परिवर्तन हुआ. बापू टावर लगभग एक एकड़ हिस्से में बनेगा.
छह मंजिला होगा टावर: चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह की स्मृति में पटना में बनने वाला बापू टावर छह मंजिला होगा. इसका बाहरी हिस्सा कॉपर का बनाया जायेगा. टावर के नीचे वाले हिस्से में बड़ी लॉबी तैयार होगी. वहां लोगों के लिए बापू और चंपारण सत्याग्रह से संबंधित ऑडियो-वीडियो उपलब्ध होंगे. टावर पर जाने के लिए लिफ्ट की व्यवस्था होगी. पर्यटक लिफ्ट से टावर के सबसे ऊपर तक जायेंगे. वहां से वे रैैंप के सहारे नीचे उतरेंगे.
सबसे ऊंची गांधी प्रतिमा बिहार में : पटना के गांधी मैदान में स्थापित 70 फुट की महात्मा गांधी की प्रतिमा देश में सबसे ऊंची है. फिलहाल बोधगया स्थित 80 फुट ऊंची महात्मा बुद्ध की प्रतिमा प्रदेश की सबसे ऊंची प्रतिमा है.
पटना : पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार में विशेष सचिव रैंक के होंगे सीईओ
पटना : पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार को बेहतर ढंग से कार्यान्वित करने के लिए राज्य कैबिनेट ने 76 पदों को मंजूरी दे दी है. इन पदों के सृजन से सरकार पर करीब 5.38 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. जानकारी के मुताबिक प्राधिकार के सीईओ विशेष सचिव या संयुक्त सचिव से कम रैंक के नहीं होंगे.
सचिव पद पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी की तैनात होगी. स्थापना पदाधिकारी, भू-संपदा पदाधिकारी, निगरानी/विधि पदाधिकारी, जनसंपर्क पदाधिकारी, मुख्य लेखा पदाधिकारी, वरीय लेखा पदाधिकारी, लेखा पदाधिकारी, निजी सहायक, निदेशक, अधीक्षण अभियंता, उच्चवर्गीय लिपिक और निम्नवर्गीय लिपिक के एक-एक पद पर नियुक्ति की जायेगी. इनके अलावा प्रशाखा पदाधिकारी के छह, सहायक के 14, एसोसिएट नगर निवेशक के तीन, सहायक नगर निवेशक के छह, सर्वे सहायक के 12, कार्यपालक अभियंता के तीन, सहायक अभियंता के छह और कनीय अभियंता के 12 पदों का सृजन भी सरकार ने किया है.
आवश्यकताओं के आलोक में अमीन, ड्राफ्टसमैन, आईटी मैनेजर, कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा इंट्री ऑपरेटर एवं मल्टी टास्किंग स्टाफ भी आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त किये जाने का प्रावधान किया गया है.
