पटना : पटना नगर निगम के इलाके में रहने वाले लोग तकरीबन आधा दर्जन टैक्स और शुल्कों के जरिये डेढ़ सौ करोड़ से अधिक की राशि निगम के खाते में जमा कराते हैं. मगर इतनी बड़ी राशि चुकाने के बाद भी लोग सड़क पर सुरक्षित नहीं चल पा रहे. सड़कों पर गड्ढे, बंद स्ट्रीट लाइटें, उफनता सीवर, आड़े-तिरछे, छोटे-बड़े डिवाइडर और थोड़ी सी बारिश में जल जमाव की समस्या जनता के नसीब में लिख सी गयी हैं. नगर वासियों से टैक्स व शुल्कों की वसूली विकास कार्य के मद में खर्च करने के लिए ही की जाती है, लेकिन निगम इस राशि को सिर्फ अपने कर्मियों के वेतन पर खर्च कर रहा है.
संपत्ति कर: मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति करने को लेकर निगम प्रशासन हाउस होल्डर्स से प्रतिवर्ष होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर) वसूलता है. इसमें औसतन 50 करोड़ से अधिक की राशि वसूली जाती है. इस साल इस मद में अस्सी करोड़ वसूलने का टारगेट रखा गया है.
स्टांप शुल्क : दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी शुल्क भी वसूली जाती है. यह शुल्क सालाना औसतन सौ करोड़ से अधिक वसूला जाता है.
स्वच्छता सेस : केंद्र सरकार के स्वच्छता सेस में भी नगर निगम की भागीदारी होती है. इसके अलावा रोड टैक्स और तमाम दूसरे टैक्स भी जनता से वसूल किये जाते हैं. इनकी आय भी करोड़ों में होती है. इसका अभी विवरण साझा नहीं किया गया है.
कुछ अन्य टैक्स : इसमें पार्किंग, शौचालय व ट्रांसपोर्ट नगर की बंदोबस्ती और विज्ञापन शुल्क शामिल है. इससे भी करोड़ों की आमदनी होती है.
खास : अनुदान-शहर के विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकारों से विकास मद में करोड़ों रुपये की अनुदान राशि भी मिलती है.
आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया: निगम को प्रतिवर्ष वेतन मद में करीब 125 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है. ऐसे में होल्डिंग टैक्स व स्टांप शुल्क से प्राप्त होने वाली अधिकतर राशि वेतन मद में ही खर्च कर दी जाती है. कुलमिला कर निगम के वित्तीय हालात पर ‘आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया’ वाली कहावत चरितार्थ हाे रही है.
