पटना : राज्यस्तरीय बीएड नामांकन प्रक्रिया तो समाप्त हो गयी. लेकिन, कई अल्पसंख्यक कॉलेज अभी भी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं. न उन्हें कानून का डर है और न ही उन्हें राजभवन का. इसकी क्या वजह है यह समझ से परे है और वे लगातार अपनी मन की कर रहे हैं.
अल्पसंख्यक कॉलेज की एक सीट के लिए दो उम्मीदवारों का चयन किया गया है. एक कॉलेज ने खुद किया है, तो दूसरा राज्यस्तरीय बीएड नामांकन प्रक्रिया की काॅर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी ने सेलेक्शन किया है. कॉलेज की ओर से खुद काउंसेलिंग कर नामांकन लिया जा रहा है. जबकि, काॅर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी के द्वारा चुने गये अभ्यर्थी भटक रहे हैं.
कॉलेज और कॉर्डिनेटिंग विवि की लड़ाई में छात्र पिस रहे हैं. काॅर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी का कहना है कि जो कॉलेज नामांकन नहीं ले रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है. छात्र-छात्राओं को यह नहीं समझ में आ रहा कि उनकी क्या गलती है. वे अधिकारियों से भी लगातार मिल रहे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा और कुछ भी नहीं मिल रहा है. शनिवार को उनके द्वारा राजभवन में ज्ञापन भी सौंपा गया. कुछ छात्रों ने गलत तरीके से एलॉटमेंट व सूची में बदलाव का भी आरोप लगाया है.
इसमें कुछ टॉपर छात्र भी हैं उनका कहना है कि उनसे कम अंक वालों का नामांकन हो गया. लेकिन, उनका नामांकन पटना में नहीं हो पाया. इसी तरह के जितने छात्र उतने तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं. वहीं, काॅर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी का कहना है कि सबकुछ फेयर तरीके से हुआ है.
