26 शहरों का मास्टर प्लान तैयार हो तो अटल जी को मिलेगी सच्ची श्रद्धांजलि

पटना : केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर वर्ष 2015-16 में अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य बड़ी आबादी वाले शहरों में जलापूर्ति, ड्रेनेज-सीवरेज, परिवहन व हरियाली के लिए पार्कों का विकास किया जाना था. इसके लिए बकायदा चार साल की कार्ययोजना तैयार […]

पटना : केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर वर्ष 2015-16 में अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य बड़ी आबादी वाले शहरों में जलापूर्ति, ड्रेनेज-सीवरेज, परिवहन व हरियाली के लिए पार्कों का विकास किया जाना था. इसके लिए बकायदा चार साल की कार्ययोजना तैयार कर पटना सहित बिहार के 26 शहरों में मिशन मोड पर काम शुरू किया गया. लेकिन, सूबे में यह योजना लक्ष्यों से काफी पीछे है.

24 महीने में देनी थी ई-गवर्नेंस सेवा मंत्रालय ने 24 महीने के भीतर इन शहरों में ई-गवर्नेंस के तहत जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रेशन, शिकायत निवारण, बिल्डिंग अप्रूवल और संपत्ति व विज्ञापन कर की सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था. इसी अवधि में निकायों की आबादी के हिसाब से कर्मियों की उपलब्धता की नीति, म्यूनिसिपल संवर्ग की स्थापना व उनका प्रशिक्षण भी देना था. लेकिन, बदहाल निकाय 36 महीने बाद भी निवासियों को यह सुविधा नहीं दे पा रहे.
अमृत में शामिल बिहार के 26 शहर
पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ, दरभंगा, पूर्णिया, आरा, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर, छपरा, दानापुर निजामत, सहरसा, हाजीपुर, सासाराम, डेहरी, सीवान, बेतिया, मोतिहारी, बगहा, किशनगंज, जमालपुर, जहानाबाद, बक्सर, औरंगाबाद.
48 महीने में जीआईएस मैपिंग कर
मास्टर प्लान का लक्ष्य
अमृत गाइडलाइन के हिसाब से 48 महीने में चयनित शहरों की जीआईएस मैपिंग कर उनका मास्टर प्लान तैयार कर लिया जाना है. इस हिसाब से वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही यह लक्ष्य पूरा होना है. अगर राज्य सरकार इसको लेकर थोड़ी गंभीर पहल करे तो इस योजना के माध्यम से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकेगी. हालांकि जीआईएस मैपिंग का काम लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय उच्च शक्ति प्राप्त संचालित समिति ने बिहार अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (बूडा) को राज्य मिशन निदेशालय के रूप में नामित कर रखा है. हालांकि, बुडको में विलय के बाद जल्द ही बूडा का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा और मिशन संचालन की कमान बुडको के जिम्मे हो जायेगी.
शहरी विकास प्राधिकार की परिकल्पना अधूरी
अमृत शहरों में तीन साल के अंदर शहरी विकास प्राधिकरणों की स्थापना व शहरी क्षेत्र के हरित आवरण को पांच साल में 15 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित है. लेकिन, बिहार में गठित सात शहरी आयोजना क्षेत्र (प्लानिंग एरिया) ही बदहाल है. हरित आवरण के लिए पार्क व ग्रीनरी को निर्माण भी लक्ष्य के हिसाब से पूरा नहीं हो पा रहा. अमृत शहरों में हर साल कम से कम एक शिशु पार्क का विकास करना है. पीपीपी के आधार पर पार्क, खेल मैदानों और मनोरंजन क्षेत्रों के रखरखाव के लिए प्रणाली भी स्थापित की जानी है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >