हाल कुर्जी बालू पर मुसहरी का, राजधानी के पेट में 18वीं सदी का एक टोला, कूड़े के बीच रहने को मजबूर
पटना : राजधानी पटना के पुराने मुहल्लों में से एक है कुर्जी. कुर्जी मुहल्ले की पहचान कुर्जी होली फैमिली अस्पताल से रही है. इसी मुहल्ले में एक जगह है कुर्जी बालू पर मुसहरी. यहां की हालत देख बस यही कहा जा सकता है कि विकास की बात यहां बेमानी लगती है. स्वच्छता अभियान को लेकर भले ही बड़ी-बड़ी बातें हो रही है लेकिन यहां के लोग आज भी शौच के लिए गंगा किनारे जाते हैं.
राज्य की पूरी सरकार इस मुहल्ले से दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर रहती है लेकिन न तो जनप्रतिनिधियों को और न ही अफसरों को इनकी तरफ देखने की फुर्सत है. 20 महादलित परिवार वाले इस टोले में करीब सवा सौ से अधिक लोग रहते हैं.
गंदगी और कूड़े के बीच रहने के अभ्यस्त ये लोग बीमार नहीं पड़ते तो यह ऊपरवाले की मेहरबानी ही है. पानी के नाम पर एक हैंडपंप लगा है, वह भी कूड़े के ढेर पर है. उसी नल का पानी लोग पी रहे हैं. कूड़ा बीन कर और सफाई कर यहां के लोग जीवन यापन करते हैं.
अंधेरे में महिलाओं को गंगा किनारे शौच के लिए जाना पड़ता है : आधा-अधूरा शौचालय बना है जो किसी काम का नहीं है. सुबह अंधेरे में महिलाओं को गंगा किनारे शौच के लिए जाना पड़ता है और फिर शाम को ये अंधेरा होने का इंतजार करती हैं. बीमार पड़े तो पीएमसीएच. आसपास कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. डॉक्टर की बात तो छोड़िए स्वास्थ्यकर्मी भी कभी आजतक देखने नहीं आया. गंदगी और बदबू इतनी कि आप पांच मिनट बैठ नहीं सकते. बकौल मोहल्ला वासी यहां कभी कोई छिड़काव नहीं हुआ. बारिश हो गयी तो घर में घुटना भर पानी लग जाता है. मकान भी कब जमींदोज हो जाये कहा नहीं जा सकता.
यहां के लोग कहते हैं कि चार-पांच पुश्तों से वो लोग यहां रह रह रहे हैं. विकास उनलोगों ने नहीं देखा. अभी तक यहां के सिर्फ एक युवक सुनील मांझी ने इंटर की पढ़ाई की है. पूजा कुमारी सातवीं का छात्रा है.
शराबबंदी से खुश हैं बच्चे और महिलाएं
परेशानियों के बाद भी मुहल्ले की महिलाएं और बच्चे शराबबंदी से खुश हैं. वे लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देते नहीं थकते. यह संवाददाता जब उनलोगों के पास पहुंचा तो उनलोगों ने कहा आप जिस कुर्सी पर बैठे हैं वह नीतीश कुमार की देन हैं. शराबबंदी के बाद घर में दो पैसा आया जिससे कुर्सी खरीदी. पहले दिन भर की कमाई शराब की भेंट चढ़ जाती थी.
हमलोगों ने विकास नहीं देखा. जिल्लत का जीवन जी रहे हैं. न रहने को मकान है न कोई सुविधा. नेताओं की विकास की बात झूठी लगती है.
-सुनील मांझी
शौचालय हमलोगों के लिए बड़ी समस्या है. सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है. शौच के लिए खेत में जाना होता है.
– शुमकरी देवी
