पटना : बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन की विशेष शाखा इकाई का रविवार को चुनाव संपन्न हो गया. हवलदार-सिपाहियों की इस यूनियन के चुनाव में एक- एक वोट के लिये घमासान हुआ. सचिव के पद को छोड़कर सभी पदों पर पहले पैनल का कब्जा रहा. चंदभूषण प्रसाद सभापति तो दूसरे पैनल केवल गणेश कुमार को जीत मिली. वह सचिव चुने गये हैं.
बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन जिला पटना बल के पदाधिकारियों की देखरेख में विशेष शाखा के सभापति, उप सभापति, सचिव, कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव, केंद्रीय सदस्य, अंकेक्षक पदों के लिये मतदान हुआ. इन सात पदों के लिये दो पैनल से कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे. एक-एक वोट के लिए घमासान मचा हुआ था. इसमें कुल 409 लोगों ने मतदान किया.
सभापति के पद पर चंद्र भूषण प्रसाद ने 214 वोट पाकर संजय कुमार सहनी को हरा दिया. सहनी को 160 वोट मिले. सचिव पद पर गणेश
कुमार सिंह को 217 वोट मिले. उन्होंने सुधांशु कुंवर सिंह को 44 वोट से हरा दिया. उप सभापति पद पर दशरथ, कोषाध्यक्ष पद पर रविरंजन कुमार, संयुक्त सचिव भ्रमणकांत चौबे , केंद्रीय सदस्य आकाश आर्यन, अंकेषक के पद पर हलदार राजकुमार पासवान को जीत मिली. दूसरे पैनल से उप सभापति के लिए चालक राम सेवक यादव, कोषाध्यक्ष पद पर अविनाश कुमार झा, संयुक्त सचिव के लिये हवलदार मो. जिबराइल खां, केंद्रीय सदस्य कमलेश कुमार और अंकेक्षक के पद पर राणा प्रताप सिंह चुनाव मैदान में थे.
जीत-हार के कारणों की समीक्षा चलती रही
पटना : बिहार पुलिस मेंस यूनियन की विशेष शाखा के चुनाव में दो ही पैनल थे. पहले पैनल के सभापति पद के उम्मीदवार हलवदार चंद्रभूषण की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी. चंद्रभूषण और इनके पैनल के दूसरे सदस्यों ने मातृ यूनियन की छाया में चुनाव प्रचार किया.
चुनाव पूरी शांति के साथ संपन्न हुआ. मतगणना के बाद विजयी पदाधिकारी तो घर चले गये लेकिन सभापति पद का चुनाव हारने वाले संजय कुमार सहनी देर रात तक चुनाव स्थल पर डटे रहे. काफी देर तक जीत-हार के कारणों की समीक्षा चलती रही.
केंद्रीय टीम और चुनाव पदाधिकारी द्वारा गड़बड़ी की गयी है. विपक्षी टीम को महासंघ का सपोर्ट मिला. मुझे भी साथियों सहयोग अच्छा मिला.
कांस्टेबल संजय कुमार सहनी, सभापति के पद पर हारे हुए उम्मीदवार
पूर्ण निष्पक्षता के साथ चुनाव हुआ. मुझे सभी को साथ औरवोट मिला. मैं अपने साथियों के हितों की सदैव रक्षा करुंगा. जो चुनाव हार गये हैं वह भी मेरे लिये सम्माननीय हैं.
हवलदार चंद्रभूषण प्रसाद, नवनिर्वाचित सभापति
पटना : पिछले साल की तुलना में इस साल नीरा की कम बिक्री होने का अनुमान है. इसके कारणों में मुख्य रूप से निपाह वायरस के खतरे को देखते हुये इसकी बिक्री पर रोक लगाना और मौसम में परिवर्तन शामिल हैं. इसका असर इस रोजगार से जुड़े करीब 40,000 लोगों पर पड़ेगा. पिछले साल इसका संग्रह प्रतिदिन करीब 30,000 लीटर तक पहुंच गया था.
उद्योग विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले साल अगस्त महीने तक करीब 11 लाख लीटर नीरा की बिक्री हुयी थी. इस बिक्री से जीविका को करीब पांच करोड़ रुपये मिले. इस साल अप्रैल महीने की शुरुआत में प्रतिदिन नीरा का करीब 100 से 200 लीटर संग्रह हुआ. निपाह वायरस को लेकर 25 मई को इसकी बिक्री रोकने की एडवायजरी जारी होने के समय इसका संग्रह करीब 12,000 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया था.
बारिश के कारण भी नहीं निकाला जा रहा नीरा : दूसरी एडवायजरी 13 जून को जारी की गयी. इसमें नीरा निकालने और बेचने पर से प्रतिबंध वापस ले लिया गया.
इसके बाद इसका संग्रह अधिकतम 1500 लीटर प्रतिदिन तक ही पहुंच सका, लेकिन बारिश शुरू होने की वजह से यह घटकर 550 लीटर प्रतिदिन पर गया. सूत्रों का कहना है कि बारिश में ताड़ की पेड़ पर फिसलन वगैरह बढ़ जाने से इसे निकालने वालों को गिरने का खतरा रहता है. वहीं ताड़ के फल अब बड़े हो गये हैं. इस कारण नीरा अब कम निकाला जा रहा और इसका संग्रह घट गया है. बता दें कि बिहार में ताड़ के करीब 92.19 लाख और खजूर के करीब 40.09 लाख पेड़ हैं.
