नीतीश कुमार के 'विजन' को कैसी नजर लगी, परेशान करनेवाली हैं पटना में गंगा घाट की ये 11 तस्वीरें

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नीतीश कुमार के 'विजन' को कैसी नजर लगी, परेशान करनेवाली हैं पटना में गंगा घाट की ये 11 तस्वीरें
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नीतीश कुमार के 'विजन' को कैसी नजर लगी, परेशान करनेवाली हैं पटना में गंगा घाट की ये 11 तस्वीरें

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंगा नदी किनारे ऐसे वॉकिंग ट्रैक की परिकल्पना की थी, जहां लोग स्वच्छ वातावरण में सैर करें, परिवार के साथ समय बिताएं और बिहार आने वाले पर्यटक भी इसकी सुंदरता का आनंद लें. लेकिन आज ऐतिहासिक एनआईटी घाट से गंगा रिसर्च सेंटर तक का यह ड्रीम प्रोजेक्ट प्रशासनिक उपेक्षा, अवैध अतिक्रमण और गंदगी की चपेट में आकर अपनी पहचान खो रहा है. पटना निवासी रंजन सिन्हा ने सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें शेयर कर अपनी तकलीफ व्यक्त की है.

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फोटो - FB/ranjansinhapro

गांधी मैदान बंद होने से गंगा घाट की ओर बढ़े, लेकिन...

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के चलते जब गांधी मैदान आम लोगों की सैर के लिए बंद हुआ, तो पटना शहरवासी सुबह की सैर के लिए ऐतिहासिक गंगा तट की ओर का रुख करने लगे. लेकिन, वहां जो नजारा दिखा, वो बहुत तकलीफदेह था. सामने ही नए बने गंगा रिसर्च सेंटर की बिल्डिंग थी, जो रंग-रोगन के अभाव में पुराने जर्जर भवन का संकेत दे रही है.

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पटना को गंगा से जोड़े रखने के लिए थी यह पहल

पटना और गंगा नदी का संबंध सदियों पुराना है. प्राचीन पाटलिपुत्र के समय से ही गंगा का तट व्यापार, संस्कृति और जनजीवन का केंद्र रहा है. इसी ऐतिहासिक जुड़ाव और आधुनिक शहर की जरूरतों को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसी पहल की थी. इसका उद्देश्य पटना को गंगा से जोड़ना, स्वच्छ पर्यावरण, पर्यटन और राजधानी को एक नई पहचान देना था.

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ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विज़न का संगम

सदियों से पटना की जीवनरेखा रही गंगा नदी के किनारे इस पथ का निर्माण केवल सड़क के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन और सार्वजनिक स्थल के रूप में राजधानी की नई पहचान बनाने के उद्देश्य से हुआ था.

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स्वच्छ वातावरण की जगह गंदगी का अंबार

सुबह की ताजी हवा और स्वच्छ माहौल की उम्मीद में आने वाले शहरवासियों को यहां जगह-जगह बिखरे कचरे और दुर्गंध का सामना करना पड़ता है.

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ड्रीम प्रोजेक्ट पर जमी उपेक्षा की धूल

जिस स्थल को लोगों के स्वास्थ्य, स्वच्छ वातावरण और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए विकसित किया गया था, वह आज उपेक्षा और बदहाली का शिकार हो चुका है.

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अवैध अतिक्रमण की चपेट में सार्वजनिक स्थल

व्यवस्थित और सुंदर सार्वजनिक स्थान पर धीरे-धीरे अवैध झुग्गी-झोपड़ियों का कब्जा होता जा रहा है, जिससे इसकी मूल संरचना और सुंदरता प्रभावित हो रही है.

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व्यावसायिक गतिविधियों और पशुपालन से बदहाली

वॉक-वे और पर्यटन क्षेत्र में खुले में बकरी पालन और अन्य अनियंत्रित गतिविधियों के कारण आम लोगों के टहलने की जगह लगातार सिकुड़ती जा रही है.

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जर्जर बुनियादी सुविधाएं और टूटे शौचालय

मूलभूत सुविधाओं के नाम पर बनाए गए सार्वजनिक शौचालय आज रख-रखाव के अभाव में टूटे-फूट और बदहाल स्थिति में पड़े हैं.

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उजड़ता कैफेटेरिया और सुविधाएं

पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के आराम के लिए बनाई गई कैफेटेरिया जैसी आधुनिक संरचनाएं आज जर्जर होकर देखरेख की बांट जोह रही हैं.

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सरकार से सौंदर्यीकरण और निरीक्षण की अपील

पटना के लोग बिहार के मुख्यमंत्री एवं संबंधित विभागों से आग्रह कर रहे हैं कि इस क्षेत्र का पुनः निरीक्षण कर अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और साफ-सफाई की स्थायी व्यवस्था की जाए.

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विकास का असली पैमाना: निर्माण नहीं, संरक्षण!

लोगों का कहना है कि किसी भी विकास परियोजना की वास्तविक सफलता केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि उसके सतत संरक्षण और बेहतर रख-रखाव में निहित होती है.

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लेखक के बारे में

By अंजनी पांडेय

अंजनी पांडेय 10 से अधिक वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय. बिहार के स्थानीय-क्षेत्रीय मुद्दों से लेकर राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी खबरों के संपादन-प्रकाशन के साथ ही न्यूज़रूम ऑपरेशन्स, सोशल मीडिया कम्यूनिकेशन और पब्लिक मैसेजिंग का भी व्यावहारिक अनुभव. कंटेंट डेवलपमेंट, ब्रेकिंग न्यूज मैनेजमेंट और ऑडियंस इंगेजमेंट में विशेषज्ञता. गूगल-रॉयटर्स से डिजिटल जर्नलिज्म और AI से जुड़े विषयों पर प्रमाणिकता हासिल की है.

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