पटना : प्रदेश कांग्रेस की टूट की आशंका के मद्देनजर शनिवार का दिन अहम माना जा रहा है. महाराष्ट्र की सभा के बाद शुक्रवार देर रात कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दिल्ली पहुंचने के बाद बिहार मसले पर कोई निर्णय की संभावना है.
शनिवार को पूरे दिन राहुल गांधी दिल्ली में उपलब्ध होंगे. माना जा रहा है कि विधायकों से मिलने के बाद राहुल गांधी कोर कमेटी में शामिल नेताओं से सलाह मशविरा करेंगे. इसके बाद ही आखिरी निर्णय लिया जायेगा.
इतना तय माना जा रहा है कि देर सबेर प्रदेश को नया कांग्रेस अध्यक्ष दिया जायेगा. नये अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक गोटियां बिछनी शुरू हो गयी है. पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह के समर्थक सबसे अधिक रेस हैं.
नके समर्थकों का मानना है कि राहुल गांधी के 10 सिंतबर को अमेरिका जाने की योजना है. इससे पहले ही आलाकमान को निर्णय लेना होगा तभी पार्टी संभावित टूट से बच सकती है. सूत्र बताते हैं कि यदि शनिवार को बिहार मसले पर कोई निर्णय नहीं हो पाया तो उनके अमेरिका से लौटने के बाद ही फैसला हो पायेगा.
इस बीच भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा ने पार्टी की संभावित टूट से इनकार किया है.उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से हमने कहा है कि यदि प्रदेश अध्यक्ष बदले जाते हैं तो नयी कमान वैसे नेताओं को सौंपी जानी चाहिए जो कम से कम पंद्रह दिन जिलों में घूम कर पार्टी को मजबूत करे. अजीत शर्मा ने बताया कि हमने राहुल गांधी के साथ वन टू वन बातचीत में 2019 के लोकसभा और अगले साल 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के कम सीटे देने की आशंका को भी जताया है.
उन्होंने खुल कर कहा कि यह अब नहीं होगा कि लालू प्रसाद दस-बीस सीट दे दें और कांग्रेस तैयार हो जायेगी. विधायकों ने राहुल गांधी से अकेले ही पार्टी को मजबूत करने के लिए पहल करने की सलाह दी है. अजीत शर्मा ने कहा कि जनता चाहेगी तो लोकसभा चुनाव के समय भाजपा के खिलाफ बड़ा गठबंधन तैयार किया जा सकता है लेकिन, शर्त यह होगी कि कांग्रेस इस गठबंधन का नेतृत्व करेगी.
