लगातार बढ़ रहे हैं बीमार बच्चों की संख्या, अधिकतर को सांस लेने में दिक्कत, पर कोरोना रिपोर्ट निगेटिव

वायरल बुखार से पीड़ित कुछ बच्चों को सांस लेने में परेशानी आ रही है. कई डायरिया की चपेट में आ गये हैं. ऐसे में संदेह के बाद डॉक्टर बच्चों की कोरोना जांच भी करा रहे हैं, हालांकि रिपोर्ट निगेटिव मिल रही है.

पटना. वायरल बुखार से पीड़ित कुछ बच्चों को सांस लेने में परेशानी आ रही है. कई डायरिया की चपेट में आ गये हैं. ऐसे में संदेह के बाद डॉक्टर बच्चों की कोरोना जांच भी करा रहे हैं, हालांकि रिपोर्ट निगेटिव मिल रही है.

शहर के पीएमसीएच व आइजीआइएमएस के ओपीडी में बच्चों की संख्या अचानक बढ़ गयी है. सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के साथ बच्चों को लाया जा रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक सांस की नलियों के ऊपरी हिस्से में संक्रमण अधिक मिल रहा है. उन्हें खांसी आ रही है.

शिशु रोग विभाग के ओपीडी में इलाज को रोजाना 250 बच्चे पहुंच रहे हैं. जबकि इससे पहले करीब 100 से 120 के बीच बच्चे इलाज को आ रहे थे. कम वजन वाले बच्चों में डायरिया डायरिया कम वजन के बच्चों में अधिक मिल रहा है, इसके बाद निमोनिया का खतरा बन जाता है. हालांकि अभी निमोनिया से पीड़ित बच्चे कम आ रहे हैं.

शहर के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एनके अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों के शिशु रोग विभाग के ओपीडी में बच्चों की संख्या बढ़ गयी है.

ब्लैक फंगस के मरीजों पर रिसर्च करेंगे डॉक्टर

कोरोना की दूसरी लहर के बाद पोस्ट कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस पर रिसर्च करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए शहर के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र रोग विभाग की ओर से रिसर्च के लिए प्रस्ताव बनाकर दिया गया है, जिस पर रिसर्च के लिए मंजूरी जल्द ही मिल जायेगी.

एथिक्स कमेटी की ओर से मंजूरी मिलते ही डॉक्टर अब मरीजों का सारा ब्योरा तैयार कर स्टडी करने में जुट जायेंगे. ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस मरीजों में फैलने की वजह डॉक्टर तलाशेंगे.

रिसर्च के परिणाम पहले प्रिंसिपल और कमेटी से साझा करेंगे. इसके बाद उसे आइसीएमआर को भी भेजा जायेगा, ताकि आने वाले दिनों में इलाज को लेकर पहले से गाइडलाइन बनायी जा सके.

Posted by Ashish Jha

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By Prabhat Khabar News Desk

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