North Bihar Post Office Scam: उत्तर बिहार के डाक विभाग (Post Office) में भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खेल सामने आया है. विभाग में करोड़ों रुपये के गबन के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें नियमों को ताक पर रखकर पदोन्नति (प्रमोशन) का तोहफा दिया जा रहा है. आलम यह है कि बड़े घोटालों के उजागर होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों की सुस्ती के कारण दोषी कर्मचारी न सिर्फ कानून के शिकंजे से बच रहे हैं, बल्कि उच्च पदों का लाभ भी उठा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, आम जनता अपनी गाढ़ी कमाई की रकम वापस पाने के लिए बरसों से डाकघरों के चक्कर काटने को मजबूर है.
6 महीने के भीतर चार्जशीट कर दोषियों को दंडित करने का प्रावधान
नियमों के मुताबिक विभागीय जांच के मामलों में 6 महीने के भीतर चार्जशीट का निष्पादन कर दोषियों को दंडित करने का प्रावधान है, ऐसा न होने पर जांच अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी है. लेकिन हकीकत इसके उलट है. मामले के प्रकाश में आने के कई महीनों बाद जांच शुरू होती है, जिससे साक्ष्यों और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ का मौका मिल जाता है. लचर पैरवी के कारण पुलिस कोर्ट में दोषियों को सजा नहीं दिला पाती, जिसका फायदा उठाकर आरोपी कर्मचारी बरी हो जाते हैं.
मामला 1: मुजफ्फरपुर में स्टांप घोटाला, चार्जशीट के बाद भी बने सुपरवाइजर
वर्ष 2020 में प्रधान डाकघर मुजफ्फरपुर में तत्कालीन प्रवर डाक अधीक्षक राजदेव प्रसाद के निरीक्षण के दौरान 25 लाख रुपये से अधिक का स्टांप घोटाला सामने आया था. नगर थाना में मामला दर्ज होने के बावजूद तत्कालीन डिप्टी पोस्टमास्टर शशि भूषण तिवारी, सहायक संजय कुमार और स्टांप ट्रेजर कृष्ण मुरारी फिलहाल जमानत पर हैं. पुलिस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. मुख्य आरोपी संजय कुमार को जांच में दोषी पाए जाने पर वेतन में कमी की सजा दी गई थी, लेकिन तत्कालीन डाक निदेशक शंकर प्रसाद ने सजा को कम कर दिया. इतना ही नहीं, कोर्ट में चार्जशीट होने के बावजूद विभाग ने उन्हें पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के पद पर प्रमोट कर दिया.
मामला 2: फर्जी खाते खोलकर किया करोड़ों का पेंशन घोटाला
वर्ष 2023 में उत्तरी बिहार के कई प्रमंडलों में फर्जी खाते खोलकर और उसमें फर्जी पेंशन की राशि दिखाकर करोड़ों रुपये के गबन का एक और बड़ा मामला सामने आया. इस मामले में प्रधान डाकघर मुजफ्फरपुर के तत्कालीन डिप्टी पोस्ट मास्टर दीनानाथ प्रसाद साह, सुरेश कुमार एवं अरविंद कुमार को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई. तत्कालीन डाक अधीक्षक मधुबनी महेश प्रसाद देव द्वारा साइबर थाना, मधुबनी में एफआइआर दर्ज कराई गई. इस घोटाले में पोस्टमास्टर जनरल मुजफ्फरपुर कार्यालय के कर्मी अमृत सागर की संलिप्तता भी पाई गई, जो फिलहाल जमानत पर है.
मामला 3: खाताधारक के अकाउंट से उड़ाए 15 लाख रुपये
उप डाकघर के तत्कालीन उप डाकपाल शशि कुमार सिंह ने द्वारिका नगर निवासी खाताधारक प्रहलाद मिश्रा के खाते से 15 लाख रुपये की अवैध निकासी कर गबन किया. जांच में दोषी पाए जाने पर मुशहरी थाना में मामला दर्ज हुआ. आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर घूम रहा है.
उत्तर बिहार के लंबित बड़े मामलों की सूची (CBI और पुलिस जांच)
- लोकाहा उप डाकघर (मधुबनी):कांड संख्या C0232022A0006 (CBI पटना) – 1.5 करोड़ से अधिक का गबन मामला लंबित.
- मोतिहारी प्रधान डाकघर: कांड संख्या 492/2021 (नगर थाना) – डाक जीवन बीमा (PLI) के भुगतान में बड़ा घोटाला.
- मधुबनी कोर्ट उप डाकघर: कांड संख्या 503/2024 (नगर थाना) – गबन का मामला अभी भी अधर में लटका है.
- सरीसबपाही उप डाकघर (मधुबनी):कांड संख्या 12/2025 (पंडोल थाना) – जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति.
- अलोला उप डाकघर (मधुबनी):कांड संख्या 39/2024 (घोघरडीहा थाना) – कानूनी कार्रवाई अब तक ठप.
- नेहरा उप डाकघर (दरभंगा):कांड संख्या 100/2025 (नेहरा थाना) – विभागीय लापरवाही के कारण जांच पेंडिंग.
मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
