नेपाल की तबाही के बीच महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों के साथ मराठी बोलकर चर्चा में आए देवेश ठाकुर, बिहार के सांसद का वीडियो वायरल

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में फंसे महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्रियों को बिहार के सीतामढ़ी में अभूतपूर्व मदद मिली. सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने न केवल सभी व्यवस्थाएं कीं, बल्कि मराठी में बात कर उनका दिल जीत लिया.

नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों को मुश्किल में डाल दिया है. घर से दूर, अनजान जगह और आपदा के बीच महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्री जब उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी पहुंचे, तो उनके सामने सबसे बड़ी जरूरत सिर्फ सुरक्षित जगह और भोजन की नहीं थी, बल्कि अपनापन और भरोसा भी था. बिहार के सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने इन तीर्थयात्रियों के लिए खाने-पीने, रहने और मेडिकल सुविधाओं का इंतजाम किया. उन्हें सुरक्षित नागपुर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई. लेकिन इस पूरी मदद के बीच एक ऐसा पल आया, जिसने इंसानियत की तस्वीर को और भी खूबसूरत बना दिया. इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है.

मराठी में बात कर सांसद ने जीता तीर्थयात्रियों का दिल

वीडियो में नजर आ रहा है कि खुले आसमान के नीचे तीर्थयात्री रात का खाना खा रहे हैं. इसी दौरान एक महिला मराठी में कहती हैं, “महाराष्ट्रीयन खाना एक नंबर है... खाना प्यार से बनाया गया है.” उनके पास खड़े सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर मुस्कुराते हुए मराठी में जवाब देते हैं, “यही सबसे जरूरी बात है.” आपदा के बीच अपनापन जताते ये चंद शब्द हजारों किलोमीटर दूर अपने घर से निकले तीर्थयात्रियों के लिए बेहद खास थे. बिहार में उन्हें सिर्फ भोजन और सुरक्षित ठिकाना ही नहीं मिला, बल्कि अपनी भाषा में बात करने वाला एक ऐसा शख्स भी मिला, जिसने उन्हें घर जैसा एहसास कराया। यही वजह है कि वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स देवेश चंद्र ठाकुर की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

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देवेश ठाकुर का महाराष्ट्र कनेक्शन

सोशल मीडिया पर इन वीडियो ने लोगों का ध्यान सिर्फ इसलिए नहीं खींचा कि एक बिहारी सांसद धाराप्रवाह मराठी बोल रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि भाषा को लेकर अक्सर होने वाली राजनीतिक बहसों के बीच यहां भाषा इंसानियत और अपनापन जताने का माध्यम बनती नजर आई. देवेश चंद्र ठाकुर के लिए मराठी कोई अचानक सीखी हुई भाषा नहीं है. सीतामढ़ी में जन्मे ठाकुर ने नासिक के सैनिक स्कूल में पढ़ाई की और बाद में पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज तथा ILS लॉ कॉलेज से शिक्षा हासिल की. महाराष्ट्र में बिताए उनके छात्र जीवन, राजनीतिक सफर और लंबे सामाजिक संबंधों ने उन्हें मराठी भाषा और संस्कृति से गहराई से जोड़ दिया.


महाराष्ट्र के CM से मराठी में बात करते दिखे ठाकुर

यही वजह है कि नेपाल की आपदा से परेशान महाराष्ट्र के लोग जब बिहार पहुंचे, तो उन्हें यहां सिर्फ खाना, रहने की जगह और मेडिकल सहायता नहीं मिली, बल्कि अपनी भाषा में बात करने वाला एक ‘अपना’ इंसान भी मिला. इसी बीच देवेश चंद्र ठाकुर का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से धाराप्रवाह मराठी में बातचीत करते नजर आ रहे हैं. ठाकुर मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाते हैं कि सभी तीर्थयात्री सुरक्षित हैं और उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है. बताया जा रहा है कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पटना-नांदेड़ एक्सप्रेस में अतिरिक्त कोच की व्यवस्था की कोशिश भी की गई.

महाराष्ट्र से पुराना है देवेश ठाकुर का नाता

देवेश चंद्र ठाकुर की मराठी पर पकड़ के पीछे महाराष्ट्र से उनका पुराना रिश्ता है. BJP किसान मोर्चा के नेशनल IT और सोशल मीडिया को-इंचार्ज राहुल झा ने X पर लिखा, “देवेश चंद्र ठाकुर जी का महाराष्ट्र में बरसों से अच्छा-खासा बिजनेस है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानने के नाते मैं कह सकता हूं कि उनकी मराठी पर अच्छी पकड़ है.” संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध उनकी प्रोफाइल के अनुसार, सीतामढ़ी में जन्मे ठाकुर ने पुणे जाने से पहले नासिक के सैनिक स्कूल में पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से BA ऑनर्स और ILS लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की.

पुणे से शुरू हुआ ठाकुर का सियासी सफर

ठाकुर ने पुणे में ही छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. उन्होंने तत्कालीन यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, जिसे अब सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है, में छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा. सीतामढ़ी जिला प्रशासन की वेबसाइट पर मौजूद उनकी प्रोफाइल के अनुसार, ठाकुर 1970 से 1980 तक महाराष्ट्र राज्य युवा कांग्रेस समिति के सदस्य रहे। इसके बाद 1980 से 1985 के बीच उन्होंने महाराष्ट्र राज्य कांग्रेस समिति में काम किया. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाद में ठाकुर महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं विलासराव देशमुख और सुशीलकुमार शिंदे के साथ काम किया। दोनों नेता आगे चलकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने.

बिहार के ‘बिहारी’, महाराष्ट्र के ‘महाराष्ट्रीयन’

TOI की रिपोर्ट में ठाकुर को ऐसे नेता के तौर पर बताया गया है, जो पुणे में पले-बढ़े और बाद में अपना राजनीतिक आधार बिहार में बनाने के बावजूद महाराष्ट्र के साथ अपने मजबूत सामाजिक और राजनीतिक रिश्ते बनाए रखे। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के लोग उन्हें महाराष्ट्रीयन मानते हैं, जबकि मुंबई और पुणे के लोगों के लिए वह ‘पक्के बिहारी’ हैं. शायद यही दो संस्कृतियों और दो जगहों से जुड़े होने की कहानी है, जिसने ठाकुर को दोनों भाषाओं और दोनों क्षेत्रों के लोगों के करीब रखा. नेपाल की आपदा के बीच महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों को जब बिहार में अपनी भाषा सुनाई दी, तो वह महज बातचीत नहीं थी- वह मुश्किल वक्त में मिले भरोसे और अपनापन की आवाज थी.

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By Rajeshkumar Ojha

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