नवादा: फूलवरिया जलाशय में फ्लोटिंग सोलर प्लांट से एक महीने में शुरू होगा बिजली उत्पादन, रजौली बनेगी हरित ऊर्जा की मिसाल

नवादा के फुलवरिया जलाशय में 10 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट अपने अंतिम चरण में है, जो अगले महीने तक बिजली उत्पादन शुरू कर देगा. यह बिहार का सबसे बड़ा जल-सौर ऊर्जा संयंत्र बनने की ओर अग्रसर है.

Nawada floating solar plant: रजौली प्रखंड की हरदिया पंचायत स्थित विशाल फुलवरिया जलाशय में बन रहा 10 मेगावाट क्षमता का अत्याधुनिक ग्रिड कनेक्टेड फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार के अनुसार, परियोजना का अधिकांश बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है और आगामी एक महीने के भीतर इससे बिजली उत्पादन शुरू होने की पूरी संभावना है. जलाशय से रजौली पावर हाउस तक 33 केवी की ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि जलाशय की सतह पर सोलर पैनल भी स्थापित कर दिये गये हैं. फिलहाल मुख्य नियंत्रण कक्ष में उपकरणों की कमिशनिंग का काम चल रहा है.

सिंचाई विभाग की तकनीकी अनुमति का काम अंतिम चरण में

जलाशय में लगे सोलर पैनलों से पावर केबल को दाईं ओर स्थित कंट्रोल रूम तक लाने के लिए जलाशय के बांध और कैनाल पुल को पार करना पड़ रहा है. इसके लिए सिंचाई विभाग से तकनीकी अनुमति और समन्वय की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. बारिश के कारण काम में हल्की रुकावट आयी है, लेकिन कमिशनिंग का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है.

कार्यपालक अभियंता के अनुसार, सिंचाई विभाग से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने और नियंत्रण कक्ष का परीक्षण संपन्न होते ही प्लांट को ग्रिड से जोड़ दिया जायेगा.

रेस्को मॉडल पर संचालित होगी परियोजना

यह परियोजना रेस्को मोड में संचालित हो रही है. इसके तहत डेवलपर एजेंसी सूर्यम इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड बिजली का उत्पादन कर विभाग को उपलब्ध करायेगी और विभाग उस बिजली की खरीद करेगा. प्रोजेक्ट के निर्माण, रखरखाव, वित्तीय प्रबंधन और संचालन का खर्च निजी एजेंसी वहन कर रही है.

बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड को इस परियोजना की नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो प्रोजेक्ट की गुणवत्ता की देखरेख कर रही है.

25 वर्षों तक 3.87 रुपये प्रति यूनिट की दर

परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में निश्चित दर पर बिजली की उपलब्धता भी शामिल है. अगले 25 वर्षों तक 3.87 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराये जाने की बात कही गयी है. इससे भविष्य में बिजली की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से राहत मिलने की उम्मीद है.

जलाशय की सतह पर तैरेंगे सोलर पैनल

फ्लोटिंग सोलर प्लांट करीब 30 से 35 एकड़ जल क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है. इससे सोलर ऊर्जा उत्पादन के लिए कृषि या आवासीय भूमि का उपयोग नहीं करना पड़ेगा. जलाशय की सतह पर तैरते सोलर पैनल पानी को सीधी धूप से ढकेंगे, जिससे गर्मी के दिनों में वाष्पीकरण कम होने में मदद मिलेगी.

इससे जलाशय में पानी का स्तर बनाये रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है. इसका लाभ स्थानीय कृषि, सिंचाई और पेयजल से जुड़े उपयोगों को मिल सकता है. परियोजना से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की भी उम्मीद है.

‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ का मॉडल

फुलवरिया जलाशय धनार्जय और जहुरा नदी पर वर्ष 1983 में बनकर तैयार हुआ था. अब यह जल, ऊर्जा और मत्स्य पालन के संयुक्त मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है. जलाशय की सतह पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाये जा रहे हैं, जबकि जलाशय के शेष हिस्से का उपयोग मत्स्य पालन और अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा.

सोलर पैनल लगाने के लिए करीब 30 एकड़ क्षेत्र का उपयोग किया जा रहा है. जलाशय में 182 फिश केज वाला आधुनिक मत्स्य पालन मॉडल भी संचालित है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार फुलवरिया जलाशय में मत्स्य उत्पादन करीब 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष तक पहुंच गया है.

पूर्ण होने पर बिहार का सबसे बड़ा फ्लोटिंग ऊर्जा संयंत्र होने का दावा

परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद इसे बिहार का सबसे बड़ा फ्लोटिंग ऊर्जा संयंत्र बताया जा रहा है. 10 मेगावाट क्षमता का यह प्लांट एक ही जलाशय से सौर ऊर्जा उत्पादन और मत्स्य पालन को साथ लेकर चलने वाले मॉडल को मजबूत करेगा.

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By कुमार मनीष देव

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