Dharmshila Devi Hospital Seal : नवादा के केन्दुआ स्थित धर्मशीला देवी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर शुक्रवार शाम जिला प्रशासन ने कार्रवाई की. पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव और जेडीयू विधायक विभा देवी के बेटे अखिलेश कुमार की मौत के मामले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराये जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का निबंधन रद्द कर दिया था. निबंधन रद्द होने के बाद अस्पताल को सील करने का आदेश जारी किया गया, जिसके बाद शुक्रवार को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल को सीलकर दिया गया.
डीएम के आदेश पर पहुंची प्रशासन की टीम
नवादा डीएम रवि प्रकाश के आदेश और सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी के निर्देश पर शुक्रवार को डॉक्टरों की टीम और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अस्पताल सील किया गया. डीएम के आदेश पर सदर प्रखंड के बीडीओ (BDO) दुनियालाल यादव को दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था. आदेश में 48 घंटे के भीतर अस्पताल को शांतिपूर्ण तरीके से सील करने का निर्देश दिया गया था.
BDO सह मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सदर अस्पताल की तीन सदस्यीय मेडिकल टीम ने कार्रवाई पूरी की. टीम में डॉ. आफताब कलीम, डॉ. अमित कुमार और डॉ. नीतेश रवि शामिल थे. सीलबंदी के दौरान पर्याप्त पुलिस बल के साथ महिला पुलिसकर्मी भी तैनात रहीं. अस्पताल सील करने से पहले परिसर को पूरी तरह खाली कराया गया.
अखिलेश की मौत के बाद शुरू हुई थी जांच
अखिलेश कुमार की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग, बिहार की ओर से गठित जांच समिति ने पूरे मामले की जांच की थी. समिति की रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को जिम्मेदार माना गया. रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बाद अस्पताल का निबंधन रद्द किया गया. इसके बाद जिला स्तर पर सीलबंदी की कार्रवाई की गई.
भर्ती मरीजों को सदर अस्पताल किया गया शिफ्ट
सीलबंदी से पहले अस्पताल में कई मरीज भर्ती थे. इनमें से दो-तीन मरीजों को एंबुलेंस से सदर अस्पताल नवादा भेजा गया. वहीं शुक्रवार को ही एक मरीज का ऑपरेशन हुआ था. स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार सील के बाद मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जानी है. अस्पताल सील होने के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ने की संभावना है.
अखिलेश कुमार की मौत के बाद लगे थे लापरवाही के आरोप
मामला पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव और नवादा विधायक विभा देवी के छोटे बेटे अखिलेश कुमार की मौत का है. 19 मार्च को सड़क हादसे में घायल होने के बाद अखिलेश को धर्मशीला देवी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में करीब 7 घंटे तक इलाज के बाद अखिलेश को रेफर किया गया.
इसके बाद उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. अखिलेश की मौत के बाद राजबल्लभ यादव ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी.
1 अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR
राजबल्लभ यादव की शिकायत पर 1 अप्रैल 2026 को नवादा के मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 119/26 दर्ज किया गया था. मामले में BNS की धारा 106(01) के तहत अस्पताल के मालिक, प्रबंधक और चिकित्सकों पर कथित लापरवाही के आरोप लगाए गए थे. शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर सदर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने धर्मशीला देवी अस्पताल का निरीक्षण कर जांच की थी. इसके बाद सिविल सर्जन की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत जांच के लिए लिखा गया.
स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय टीम ने की जांच
स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय जांच टीम 3 जून 2026 को नवादा पहुंची थी. जांच के दौरान दोनों पक्षों के लोग भी मौजूद रहे. पूर्व मंत्री ने स्वास्थ्य बीमा कंपनी से जुड़े मामले का हवाला देते हुए फर्जी मरीजों के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की जांच की मांग भी की थी.
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जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया. इसके बाद अस्पताल का निबंधन रद्द करने की कार्रवाई की गई. अस्पताल और संबंधित पक्षों को इसकी सूचना ईमेल के माध्यम से गुरुवार को ही दे दी गई थी. फिलहाल अस्पताल को सील कर दिया गया है और मामले में पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई की जा रही है.
