हिसुआ : राजगीर-गया एनएच 82 पर तिलैया नदी पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिये जाने के बाद सरकार की ओर से स्थायी डायवर्सन बनाने की पहल नहीं की गयी है. 21 जुलाई, 2012 को ही पुल क्षतिग्रस्त हुआ था और इससे आवाजाही पर रोक लगा दी गयी थी.
जिले में एनएच 31 के बाद यह सबसे व्यस्त दूसरा मुख्य मार्ग है, लेकिन पथ निर्माण विभाग इसका हल निकालने में अभी तक कोई पहल नहीं कर सका है. एस्टिमेट बनने व टेंडर कराने की प्रक्रिया चलने की बात बार-बार अधिकारियों द्वारा बतायी गयी पर, फलाफल कुछ भी नहीं हुआ़ निजी स्तर से पूर्व राज्य मंत्री राज बल्लभ प्रसाद और बट थाई नालंदा फाउंडेशन द्वारा तीन बार डायवर्सन बनाया गया, जिस अस्थायी डायवर्सन से वाहन गुजर रहे हैं.
नहीं, तो आम यात्री व पर्यटकों को गया-राजगीर आना-जाना भी संभव नहीं हो पाता. इधर, अधिकारी भी डायवर्सन के मुद्दे पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं. वैसे इस पथ को फोर लेन में बदलने की प्रक्रिया चल रही है. निर्माण का टेंडर हो जाने की जानकारी मिली है, लेकिन इसके पूरा होने में काफी समय लगेगा. ऐसे में डायवर्सन की जरूरत है.
स्थायी डायवर्सन जरूरी
बौद्ध सर्किट बोधगया, गया, राजगीर, कुंडलपुर, पावापुरी को जोड़ने वाले इस राष्ट्रीय राज मार्ग से पर्यटकों की आवाजाही काफी होती है. देश-विदेश से सालों भर पर्यटक का इस रास्ते बोधगया से राजगीर आते-जाते रहते हैं. यही नहीं गया की किराना मंडी से नवादा व नालंदा दोनों जिलों में किराना समानों की ढुलाई इस मार्ग से ही होती है.
