अविनाश ने बढ़ाया मान

– उदय कुमार भारती – हिसुआ : हिसुआ के युवा डॉ अविनाश कुमार वैज्ञानिक बन क्षेत्र का मान बढ़ाया है. अविनाश तटीय क्षेत्र, समुद्री मुहाने की भौगोलिक प्रक्रिया पर रिसर्च कर वैज्ञानिक बने हैं. साथ ही नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड ओसन रिसर्च मिनिस्ट्री ऑफ ओसन साइंस वास्कोडिगामा में योगदान किया है. तटवर्ती क्षेत्रों में […]

– उदय कुमार भारती –

हिसुआ : हिसुआ के युवा डॉ अविनाश कुमार वैज्ञानिक बन क्षेत्र का मान बढ़ाया है. अविनाश तटीय क्षेत्र, समुद्री मुहाने की भौगोलिक प्रक्रिया पर रिसर्च कर वैज्ञानिक बने हैं. साथ ही नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड ओसन रिसर्च मिनिस्ट्री ऑफ ओसन साइंस वास्कोडिगामा में योगदान किया है.

तटवर्ती क्षेत्रों में सुनामी, साइकॉलोन, बपरइल पर उन्होंने स्तरीय रिसर्च कर पढ़ायी के दौरान ही कई अवार्ड सम्मान भी हासिल की है. अनुसंधान के क्रम में मारिशस ईरान की यात्र भी कर चुके हैं.

डॉ अविनाश शहर के प्रोफेसर कॉलोनी निवासी डॉ अमरनाथ राव मंजु लता के पुत्र हैं. बचपन से ही मेधावी अविनाश 1999 में हायर सेकेंडरी हिसुआ से 78 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण हुए थे. 2002 में पटना यूनिवर्सिटी से बीएससी 69 प्रतिशत 2005 में कोचिंग किया. 2012 में मेंगलौर यूनिवर्सिटी से पीएचडी किया. अविनाश हिंदी, अंगरेजी, कनाडा मलायालम भाषा जानते हैं.

प्राप्त किये कई अवार्ड

अविनाश रिसर्च पढ़ायी के दौरान प्रतिभा का परचम लहराते रहे. 2005 में साइंस एंड टेक्नोलॉजी नयी दिल्ली से जूनियर फेलोशिप अवार्ड, 2008 में कॉन्सिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च नयी दिल्ली से सीनियर फेलोशिप अवार्ड, 2010 में मशहाड, ईरान में फस्र्ट इंटरनेशनल अप्लाइड जियोलॉजिकल कांग्रेस में सम्मान प्राप्त किये हैं. उनके राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिसर्च नोट्स और पब्लिकेशनों की भरमार है, जिन्हें इंटरनेट पर भी देखा जा सकता है.

इंटरनेशनल जनरल को भी सराहा जा रहा है. डॉ अविनाश ने 50 वैज्ञानिकों का नेतृत्व तीन माह तक उस समय किया, जब सभी वैज्ञानिक हिंद महासागर में ओआरवी सागर केन्या एसके-301 पर रिसर्च के लिए गये.

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