पिता हैं सृजक व पालक

नवादा कार्यालय: वरीय नागरिक संघ एवं मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को पितृ दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संघ के अध्यक्ष डॉ एसएन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पिता के चरण स्पर्श से कतिपय सुपुत्रों द्वारा किया गया. डॉ शर्मा ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा […]

नवादा कार्यालय: वरीय नागरिक संघ एवं मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को पितृ दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संघ के अध्यक्ष डॉ एसएन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पिता के चरण स्पर्श से कतिपय सुपुत्रों द्वारा किया गया. डॉ शर्मा ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पिता सृजक एवं पालक हैं.

मनुष्य का प्रारंभिक संस्कार का संवाहक पिता ही है. प्रतिष्ठान के सचिव डॉ ओंकार निराला ने कहा कि पिता एक विशाल न्योग्रोध वृक्ष है, जिसकी छाया में सुखदायनी शीतलता का अनुभव करते हैं तथा उनके संरक्षण में पुत्र अपने जीवन के भविष्य को सबारते हैं. समीक्षोपरांत उपस्थित वक्ताओं ने अपने भावों को अभिव्यक्त कर कहा कि पाश्चात्य देश के प्रभाव में हमारी भारतीय संस्कृति का अवमूल्यन हो गया है. फलस्वरूप पिता देव तुल्य होकर भी अपने ही घर में उपेक्षित है.

यह एक राष्ट्रीय चिंतन का विषय है. लोगों ने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया. संगोष्ठी में बच्चू सिंह, सिद्धेश्वर सिंह, शालिग्राम पांडेय, गौरी शंकर प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद, रामाधीन सिंह, शिवदानी सिंह, रामोतार गुप्ता, किशुन मिस्त्री व विपिन बिहारी सिंह आदि उपस्थित थे.

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