रोहिणी नक्षत्र के पूरी तरह गरम रहने पर ही होती है अच्छी बारिश
अब तक कहीं भी नहीं गिरे बिचड़े
नवादा (सदर) : अति वृष्टि व अनावृष्टि दोनों ही खरीफ फसल के लिए घातक होता है. पिछले वर्ष जोरदार बारिश से धान की फसल व दलहन फसलों की बेहतर उपज हुई थी. इस बार तपिश भरी गरमी के बावजूद किसानों के जेहन में कम बारिश होने की आशंका बनती जा रही है. जानकार किसानों का मानना है कि रोहिणी नक्षत्र जब तक पूरी तरह गरम नहीं होता है, तक तब बेहतर बारिश की संभावना कम ही होती है.
अभी रोहिणी नक्षत्र अंतिम चरण में है और आसमान पर उमड़ते-घूमड़ते बादलों के साथ बूंदा-बांदी कमजोर मौसम का परिचायक बन रहा है. आशंका यह भी जतायी जा रही है कि रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने के पहले कही और अधिक बारिश न हो जाये.
इन स्थितियों से किसान पूरी तरह सशंकित हैं.
डीजल पंपसेट के सहारे ही करनी पड़ेगी रोपनी
रोहिणी नक्षत्र बीतने को है, परंतु अभी तक किसी भी प्रखंड में धान का बिचड़ा नहीं गिराया है. इसका मुख्य कारण मलमास (दोमास) को लेकर दो आषाढ़ माह का होना है. मान्यता यह है भी है कि मलमास का ध्वजारोहण के बाद पूरे एक माह बारिश की संभावना कम हो जाती है. इस कारण किसान सशंकित हैं कि डीजल पंप सेट के सहारे ही धान की रोपनी करानी होगी. बहरहाल रोहिणी नक्षत्र में बूंदा-बांदी मलमास का दो आषाढ़ कहीं न कहीं कम बारिश की सूचना दे रहा है.
