वैशाख में ही जेठ जैसी गरमी
शादी-विवाह के मौसम में मजबूरी में बाहर निकल रहे लोग
नवादा (सदर) : अचानक पारा चढ़ने से वैशाख में ही जेठ जैसी गरमी महसूस होने लगी है. दोपहर में तो तपिश इतनी बढ़ जाती है कि लोगों का घर से बाहर निकलना मुहाल हो गया है. दिन में गरम हवाएं चलने के कारण लोग छांव की तलाश में हैं. तेज धूप के कारण लोग सब नौ-10 बजे के बाद घरों से निकलने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं. शादी-विवाह के मौसम के कारण लोगों के घरों से निकलना मजबूरी है. गरमी के कारण नदी, पोखर व तालाबों में पानी की कमी हो गयी है.
पारा बढ़ने से कई घरों में लगे चापाकल से भी पानी निकलना कम हो गया है. वहीं, बिजली की आंख मिचौनी भी लोगों की समस्या बढ़ाने में सहायक हो रही है. गरमी के इस मौसम में कई बीमारियों के दस्तक देने से सरकारी व निजी डॉक्टरों के पास रोगियों की संख्या बढ़ रही है. तपिश भरी गरमी से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों व लाने, पहुंचाने वाले अभिभावक को हो रहे हैं. बच्चे छाता के सहारे स्कूल व कोचिंग जा रहे हैं. तापमान बढ़ने से पेयजल की समस्या भी बढ़ी है.
पशुओं पर ध्यान देना जरूरी
इस मौसम में पशुपालकों को भी पशुओं को बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतनी होगी. पशु अस्पताल में समुचित मात्र में दवा नहीं होने से पशुपालकों की परेशानी और बढ़ गयी है.
इस भीषण गरमी में पशुओं को डायरिया, बुखार, चमोकन होने आदि का डर बना रहता है. इस तरह के रोगों से बचने के लिए सावधानी की जरूरत है. ऐसे समय में तो हर सप्ताह पशुओं के स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता होती है.
इसके लिए सुबह-शाम पशुओं को स्नान करना, प्रचुर मात्र में पानी पिलाना, दोपहर को घर से नहीं निकला, अगर गरमी से जानवर हॉफने लगे तो ग्लूकोज का पानी देना, जानवरों को हरा चारा समुचित मात्र में देना, विदेशी नस्ल की गायों को हवादार स्थान पर रखे व पंखों का प्रयोग करे, पॉल्ट्री के स्थान को ठंडा रखें.
