वारिसलीगंज : प्रदेश में शिक्षा कि स्थिति सुधार के लिए कई उच्च विद्यालय को अपग्रेड कर इंटर विद्यालय बना दिया गया है. हरेक पंचायत में एक इंटर विद्यालय खोला जा रहा है. प्लस टू हुए विद्यालय में बच्चे का नामांकन भी हो रहा है. बच्चे अच्छे नंबर से पास भी हो रहे हैं, लेकिन बिना शिक्षक के ही.
कुछ ऐसी ही स्थिति प्रखंड मुख्यालय स्थित नेशनल विद्यालय माफी का है. कुछ समय पहले यह विद्यालय अपने बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए जिला में ही नहीं प्रदेश में भी जाना जाता था. लेकिन, आज स्थिति यह है कि ज्यादातर प्रमुख विषयों के शिक्षक ही नहीं है.
इस विद्यालय में इंटर विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए विज्ञान ही नहीं कला संकाय में भी शिक्षक नहीं है. विद्यालय में हिंदी, इतिहास, राजनीति शास्त्र व गृह विज्ञान के ही शिक्षक मौजूद हैं. ऐसे में यहां के सभी विद्यार्थियों को निजी कोचिंग सेंटर का ही सहारा लेना पड़ता है. इस स्कूल के बच्चे बार कई राज्य स्तरीय व जिला स्तरीय प्रतियोगिता में विद्यालय का नाम रोशन किये हैं. हाल ही में श्रेया कुमारी विज्ञान प्रदर्शनी पटना पहुंची, शिवम ने जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया. इस तरह कई बचचों कबड्डी, खो-खो जैसे खेलों में नाम किया है.
पुस्तकालय भवन नहीं
छह साल पहले पुस्तकालय भवन का निर्माण कराने के लिए संवेदक को ठेका दिया गया था. लेकिन लापरवाही के कारण आज तक वह पूरा नहीं हो सका है. जरूरी सुविधा जैसे पीने का पानी के लिए चार चापाकल व 10 नलकूप लगे है. समुचित बिजली का प्रबंध है. लगभग आठ स्थायी शौचालय है.
खेल मैदान की भी कमी
स्कूल कैंपस में विद्यार्थियों के खेलने के लिए विद्यालय प्रशासन द्वारा बॉस्केटबॉल पिच का निर्माण कराया गया है. यहां कबड्डी, खो-खो जैसे खेलों के लिए जगह है, लेकिन क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेलों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. हालांकि, खेल मैदान के नाम पर विद्यालय के पास पांच एकड़ जमीन है, जिस पर स्टेडियम बनाने के लिए लिखा गया है.
