हिसुआ : गया-हिसुआ-बिहारशरीफ एनएच 82 के फोर लेन बनने का काम इस वर्ष अगस्त-सितंबर से शुरू होने की संभावना है. सड़क बनाने से संबंधित सभी बाधाएं व औपचारिकता पूरी कर ली गयी है. मात्र दो-तीन औपचारिकता ही बाकी है. बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट के जेनरल मैनेजर व अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, टेंडर भरने वाली कंपनियों की शार्टलिस्टिंग का काम पूरा हो चुका है.
फाइनल टेंडर का काम अब अंतिम चरण में है. टेंडर के बाद फाइनेंशियल प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. टेंडर बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा भरा गया है. इसमें मुंबई के एफकॅान इन्फ्रास्ट्रक्चर, गैमन इंडिया, हैदराबाद की गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड, आइएल एंड एफएस इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन, इरकॉन इंटरनेशनल, केएनएनआर कंस्ट्रक्शन, रैमकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, नासिक के अशोका बिल्डकॉन लिमिटेड, हरियाणा के बीबीसी-सीएंडसी जेवी, गुड़गांव के पुंज लायंड, कोलकाता के सिंप्लेक्स आदि कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया है.
गौरतलब है कि इस पथ के निर्माण के लिए केंद्र सरकार का जापान की जायका कंपनी से एग्रीमेंट हुआ है. 1408 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 92.5 किलोमीटर फोरलेन का निर्माण होना है. बौद्ध सर्किट का यह पथ बन जाने से देश-विदेश के आने वाले पर्यटकों को काफी सुविधा होगी. इसके अलावा क्षेत्र के इस व्यस्तम मार्ग पर आम आवागमन भी बेहतर हो जायेगा.
हिसुआ में सड़क की शक्ल पर ऊहापोह: हिसुआ विश्वशांति चौक से गुजरने वाली इस सड़क के हिसुआ सीमा के भीतर फोरलेन बनने पर ऊहापोह की स्थिति बरकरार है. रोड डेवलपमेंट विभाग व संबंधित अधिकारी इस पर कुछ भी खुल कर बता नहीं पा रहे हैं. नगर पंचायत हिसुआ के भीतर के पथों का चौड़ीकरण पर भी संशय है. बाइपास के लिए आमजन व संघर्ष मोरचा सक्रिय हुआ, पर सार्थक फलाफल की कोई जानकारी नहीं मिल रही है.
बाइपास निकलने की संभावना पर भी संबंधित अधिकारी कुछ नहीं बता पा रहे हैं. भारत सरकार द्वारा जारी किया गये राजपत्र में हिसुआ नगर पंचायत की भूमि का विवरण नहीं दरसाया गया है. सीमा के बाहर की भूमि का ही विवरण, खाता, प्लॉट व रकबा जारी होने की बात बतायी जा रही है. लोग अगला राजपत्र आने का इंतजार कर रहे हैं. इस पर पूरी तरह से ऊहापोह बरकरार है कि हिसुआ में रोड की चौड़ाई बढ़ाने के लिए कितना तोड़ा जायेगा या हिसुआ के बाहर से बाइपास बनाया जायेगा.
