रख-रखाव नहीं होने से बरबाद हो रही करोड़ों की संपत्ति
नवादा (सदर) : दो दशक पहले यह बस पड़ाव हर तरह से संपन्न था. रहने के लिए सुंदर भवन, साफ -सुथरा कार्यालय, यात्रियों के लिए यात्री शेड, वाहन खड़ा करने के लिए बड़ा मैदान, बस में ईंधन के लिए पेट्रोल पंप, बस में तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए वर्कशॉप, पंर बनाने के लिए टायर सेक्शन, पीने के लिए पानी टंकी, ड्राइवर, कंडक्टर व कर्मियों को पूजा के लिए शिवमंदिर, गाड़ी धोने के लिए मशीन, पूरे परिसर में ऊंची चहारदीवारी सहित अन्य सुविधाओं से लैस था.
कोर्ट परिसर में चली गयी डेढ़ एकड़ जमीन : सरकारी बस पड़ाव की डेढ़ एकड़ भूमि पर ही कुछ वर्ष पहले व्यवहार न्यायालय का भवन बनाया गया है. हालांकि, इसके एवज में बीएसआरटीसी को कृषि फॉर्म में जमीन दिया गया है. लेकिन, अभी तक यह जमीन प्रतिष्ठान के कब्जे में नहीं आ सका है. फिलहाल निगम परिसर में साढ़े पांच एकड़ भूमि बची है.
पार नवादा स्थित बस डिपो में भी निगम की सोलह डिसमिल जमीन है. कर्मचारियों की कमी से भी निगम का जूझना पड़ रहा है. वर्ष 1988 से ही इलेक्ट्रिशियन हेल्पर के पद पर काम कर रहे चहिया उस्मानी को दो माह पहले फोरमैन का चार्ज दिया गया है. फोरमैन का पद गोपाल प्रसाद के सेवानिवृत्ति के बाद खाली हुआ. फोरमैन चहिया उस्मानी ने बताया कि वह इस योग्य नहीं है. विभाग के तरफ से जबरदस्ती उनको जिम्मेवारी दे दिया गया है. वह सिर्फ हस्ताक्षर करते हैं.
पुरानी बसों की नीलामी का इंतजार : स्थानीय बस पड़ाव में नीलामी के लिए पुरानी 12 बसें खड़ी हैं. इसमें छह-सात बसें झारखंड सरकार के हिस्से की है. बिहार से झारखंड के हिस्से गयी बसों को भी यहां से नहीं हटाया गया है. किसी कारण से झारखंड के हिस्से की बसों को भी यहीं छोड़ दिया गया है.
