नवादा नगर : बालश्रम सभ्य समाज में एक अभिशाप है इसकी समाप्ति के लिए मिल कर काम करने होंगे. उक्त बातें यूनिसेफ द्वारा आयोजित प्रखंड स्तरीय कार्यशाला में कही गयी. कार्यक्रम की शुरुआत सदर एसडीओ अनु कुमार के अलावे अन्य अधिकारियों ने दीप जला कर किया. बालश्रम के आंकड़े चौंकानेवाले हैं. पुरे राज्य के 51 प्रखंडों को बालश्रम मुक्त बनाने के लिए चयनित किया गया है. इसमें जिले के सदर प्रखंड व अकबरपुर प्रखंड शामिल हैं.
सदर प्रखंड कार्यालय में राज्य के चिह्नित 51 प्रखंडों में से एक नवादा प्रखंड में आयोजित कार्यशाला में बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़े मुख्तारूल हक व मो शैफ उर्र रहमान ने विस्तार से बालश्रम के कारण व निवारण पर प्रकाश डाला. बालश्रम को समाप्त करने के लिए जिले में 15 मार्च तक वार्ड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन करने तथा 12 जून तक बालश्रम के अभिशाप को समाप्त करने का लक्ष्य बनाया गया है.
बालश्रम को समाप्त करने के लिए चलेगा अभियान : बालश्रम कानून के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी काम पर नहीं लगाया जा सकता है. लेकिन, विडंबना है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 32752 बच्चे राज्य के बाहर विभिन्न फैक्ट्रियों में गैरकानूनी तरीके से बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे हैं.
यूनिसेफ द्वारा हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सदर प्रखंड व अकबरपुर प्रखंड में 15 मार्च तक सभी पंचायत व वार्ड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन करके बालश्रम को रोकने के लिए प्रयास तेज करने हैं. स्थानीय जनप्रतिनिधि, शिक्षा, पुलिस प्रशासन आदि से संबंधित अधिकारियों को टास्क फोर्स समिति में जोड़ते हुए टास्क फोर्स के माध्यम से जागरूकता व धावा दल द्वारा बच्चों से काम लेनेवालों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की जायेगी.
धावा दल होगा सक्रिय : बालश्रमिकों को पकड़ने के लिए श्रम विभाग का धावा दल सक्रिय होगा. जिला, प्रखंड, पंचायत व वार्ड स्तर पर बने टास्क फोर्स की टीम जागरूकता फैलाने के अलावे बालश्रमिकों से काम करानेवाले लोगों की पहचान करके धावा दल हो इसकी सूचना देंगे. इसके बाद छापेमारी का अभियान तेज किया जायेगा.
राजस्थान सरकार के साथ समझौता
राज्य के बाहर रहकर फैक्ट्रियों में काम करने वाले छोटे बच्चों को वापस लाने के अभियान को गति देने के लिए राजस्थान सरकार के साथ समझौता किया गया है. बाहर में काम कर रहे 32752 बच्चों को लाने के बाद उनके रिहैबिटेशन के लिए सरकार के द्वारा आर्थिक मदद की व्यवस्था की गयी है.
बाहर से वापस लौटाने वाले प्रत्येक बच्चों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 25-25 हजार रुपये की राशि दिलाये जायेंगे. कार्यशाला में बालश्रम को समाप्त करने का संकल्प लिया गया.
कार्यक्रम में सदर एसडीओ अनु कुमार, श्रम अधीक्षक अमरेन्द्र नारायण, सदर प्रखंड बीडीओ कुमार शैलेन्द्र, नेहरू युवा केंद्र के को-ऑर्डिनेटर केके सिंह, जिला प्रोग्राम कोर्डिनेटर स्मिता सिंह, प्रखंड प्रमुख के प्रतिनिधि विनय सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने भी अपनी बातों को रखते हुए बाल श्रम को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया गया.
12 जून तक का समय निर्धारित
बालश्रम को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए 12 जून तक का समय निर्धारित किया गया है. बचपन बचाओ आंदोलन के मुख्तारूल हक ने अपने अनुभवों को शेयर करते हुए कहा कि बाल श्रम एक अपराध है.
इससे बच्चे के आगे बढ़ने की संभावना समाप्त होती है साथ ही युवाओं के सामने बेरोजगारी की समस्या भी आती है. वार्ड स्तर पर गठित टास्क फोर्स यदि सक्रियता से काम करती है तो तय समय में बालश्रम को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल किया जायेगा.
