रास्ते में तब्दील हुए फुलवारिया केनाल के दोनों छोर
नरहट : जिले के अति महत्वाकांक्षी फुलवारिया जलाशय परियोजना से निर्माण से अबतक नरहट प्रखंड के खेतों को एक बूंद भी पानी नसीब नहीं हुआ है. निर्माण के चार दशक के बाद फुलवारिया केनाल का अस्तित्व अब समाप्त होता जा रहा है. नरहट, सिरदला व रजौली प्रखंड क्षेत्र के बहुत बड़े भूभाग की सिंचाई को वर्ष 1980 के करीब फुलवारिया डैम व फुलवारिया केनाल का निर्माण कराया गया था.
रजौली प्रखंड के फुलवरिया गांव के समीप धनार्जय नदी पर विशाल डैम का निर्माण किया गया था. साथ ही सतत सुखाड़ ग्रस्त जिले के चार प्रखंडों के खेतों की प्यास बुझायी जा सके व किसानों को इसका लाभ मिल सके. ऐसा प्रयास शुरू हुआ.
किसानों ने दी जमीन पर नसीब नहीं हुआ पानी : निर्माण के लिए संबंधित प्रखंड के किसानों से उनकी जमीन ली गयी व कार्य प्रारंभ किया गया. आज भी सैकड़ों ऐसे परिवार हैं जिनकी भूमि अर्जित की गयी परंतु मुआवजे की रकम अबतक नहीं मिली है. रजौली प्रखंड से शुरू होकर तथा सिरदला के विभिन्न गांव होते हुए नरहट प्रखंड के खनवां, बंडाचक, इब्राहीमपुर, नरहट, इजहारचक, कुशा, पुनौल, बेरौटा, मीनापुर व नरहट थाने के पास नारायणपुर, जमुआरा, गजरा चातर व बाचोचक के पास फुलवारिया के दो केनाल समाप्त हो जाते हैं. इस नहर का निर्माण जब प्रारंभ हुआ तब यहां के किसानों में काफी उल्लास व जोश खरोश था.
अब खेतों के दिन लौटनेवाले हैं, ऐसी उम्मीद जगी. परंतु दुर्भाग्यपूर्ण की स्थिति यह है कि नरहट प्रखंड के किसानों को इन दोनों केनालों में पानी का दर्शन तक नहीं हुआ. पूरे नरहट प्रखंड में यह दोनों केनाल व इसके पुल पुलिये अपना अस्तित्व खोते जा रहा है. इस प्रखंड के कई स्थानों पर इस केनाल के पिंडों को सड़क में तब्दील कर लोग इसे संपर्क पथ में उपयोग कर रहे हैं. जैसे मीनापुर से बाजोचक, मीनापुर से पुनौल, नरहट थाने के पास से गजरा चातर व इब्राहिमपुर से बंडाचक के लोग इन्हीं नहरों पर बने सड़क के सहारे आवागमन का कार्य करते हैं.
