मुजफ्फरपुर से रजनीश की रिपोर्ट
Sawan Nag Panchami: इस वर्ष सावन शुक्ल पंचमी यानी नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा. इस खास दिन हस्त नक्षत्र और साध्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान शिव के रुद्राभिषेक, कालसर्प दोष और पितृ दोष की शांति के लिए बेहद फलदायी है. प्रोफेसर पंडित प्रभात मिश्रा के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.
Shiva Puja: हस्त नक्षत्र और साध्य योग का विशेष संयोग
सोमवार के दिन पड़ने वाली नाग पंचमी पर दुर्लभ योग बन रहा है. इस दिन शिव भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक कर सकते हैं. कुंडली में मारकेश की स्थिति होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है.
भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का महत्व
सृष्टि के आरंभ से ही नाग देवता की पूजा की परंपरा चली आ रही है. भगवान शिव के गले में वासुकि नाग सुशोभित हैं और भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विराजमान हैं. नाग पूजन के पश्चात कुल देवता की पूजा करने का भी विशेष विधान है.
मनोकामना पूर्ति के लिए अचूक मंत्र
इस पावन दिन पर दरिद्र-दुःख-दहन मंत्र का पाठ करने से जीवन के दुख मिट जाते हैं. नाग देवता को दूध और लावा अर्पित किया जाता है. इसके साथ ही भगवान शिव को दूध, भांग और बेलपत्र अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
कालसर्प और पितृ दोष से मुक्ति
धार्मिक दृष्टि से यह महासंयोग कालसर्प दोष और पितृ दोष से पीड़ित जातकों के लिए वरदान समान है.इस दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से नाग देवता और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
यह भी पढ़ें... BSNL का धमाकेदार प्लान: मात्र 1 रुपये में सिम और 24 दिनों की कॉलिंग-डेटा सुविधा
