आलू की खेती से लाखों कमाना चाहते हैं? कृषि वैज्ञानिक ने बताए बंपर मुनाफे के आसान तरीके

Potato Farming: उत्तर बिहार में आलू की वैज्ञानिक खेती कैसे करें? जानें उन्नत किस्में, बुआई का सही समय, खाद, सिंचाई, रोग नियंत्रण और भंडारण की पूरी जानकारी. कृषि वैज्ञानिक की सलाह.

Potato Farming: उत्तर बिहार की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं आलू की खेती के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं. यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, उन्नत किस्मों का चयन करें और समय पर पोषक तत्व एवं सिंचाई का प्रबंधन करें, तो प्रति एकड़ बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश सिंह के अनुसार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आलू की खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.

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उत्तर बिहार क्यों है आलू उत्पादन के लिए बेहतर?

मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय सहित उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक और कोसी जैसी नदियों से बनी जलोढ़ मिट्टी उपलब्ध है. यह मिट्टी आलू के कंदों के विकास के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

आलू के लिए उपयुक्त जलवायु

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यदि रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है, तो कंद बनने की गति धीमी हो जाती है.


कैसी मिट्टी सबसे बेहतर?

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जलभराव होने पर आलू के कंद सड़ने लगते हैं, इसलिए खेत समतल और भुरभुरा होना चाहिए.


खेत की तैयारी कैसे करें?

  • एक बार गहरी जुताई करें.
  • 3-4 बार कल्टीवेटर या हैरो चलाएं.
  • अंतिम जुताई में प्रति हेक्टेयर 20-25 टन सड़ी गोबर खाद या कंपोस्ट मिलाएं.

उत्तर बिहार के लिए उन्नत आलू की किस्में

किस्मविशेषताऔसत उत्पादन
कुफरी अशोकजल्दी तैयार200-250 क्विंटल/हेक्टेयर
कुफरी पुखराजझुलसा रोग प्रतिरोधी300 क्विंटल/हेक्टेयर
कुफरी ज्योतिपिछेती झुलसा से सुरक्षाअच्छी गुणवत्ता
कुफरी बहारसफेद गोल कंदअधिक मांग
कुफरी सुतलेजस्वादिष्ट, बेहतर भंडारण350 क्विंटल/हेक्टेयर
कुफरी सिंदूरीलाल कंद, अधिक बाजार मांगलंबा भंडारण
कुफरी चिपसोना-1/2चिप्स उद्योग के लिए उपयुक्तप्रोसेसिंग ग्रेड

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बीज कितना लगाएं?

विवरणमात्रा
बीज दर25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
एक कंद का वजन30-40 ग्राम
आंखेंकम से कम 2-3

बीज उपचार

  • कोल्ड स्टोरेज से निकालने के बाद 7-10 दिन छाया में रखें.
  • बाविस्टिन (2 ग्राम/लीटर) या मैनकोजेब (3 ग्राम/लीटर) के घोल में 10-15 मिनट उपचार करें.

बुआई कब करें?

उत्तर बिहार में मुख्य फसल की बुआई का सबसे अच्छा समय 25 अक्टूबर से 15 नवंबर तक माना जाता है.

दूरी

विवरणदूरी
कतार से कतार60 सेमी
पौधे से पौधा20-25 सेमी
गहराई5-7 सेमी
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किसानों को मेड़ों पर बुआई करनी चाहिए. इससे जल निकासी बेहतर रहती है और कंद स्वस्थ विकसित होते हैं.


खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

पोषक तत्वमात्रा (प्रति हेक्टेयर)
नाइट्रोजन150 किग्रा
फास्फोरस80 किग्रा
पोटाश100 किग्रा

कब दें?

  • आधी नाइट्रोजन + पूरी फास्फोरस + पूरी पोटाश बुआई के समय.
  • बची हुई नाइट्रोजन 30-35 दिन बाद मिट्टी चढ़ाते समय.

सिंचाई कब करें?

  • पहली सिंचाई बुआई के तुरंत बाद.
  • इसके बाद 7-10 दिन के अंतराल पर.
  • कुल 5-6 सिंचाइयां पर्याप्त रहती हैं.

सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई कंद बनने के समय (45-60 दिन बाद) होती है.

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मिट्टी चढ़ाना क्यों जरूरी है?

30-35 दिन बाद पौधों पर मिट्टी चढ़ानी चाहिए.

इसके फायदे—

  • कंद धूप से सुरक्षित रहते हैं.
  • हरा आलू बनने से बचता है.
  • उत्पादन बढ़ता है.
  • बाजार मूल्य बेहतर मिलता है.

प्रमुख रोग और बचाव

रोगपहचानउपचार
पिछेती झुलसापत्तियों पर जले जैसे धब्बेरेडोमिल गोल्ड या मैनकोजेब 2 ग्राम/लीटर
अगेती झुलसागोल-गोल धब्बेकॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम/लीटर

प्रमुख कीट

माहू (एफिड)

  • पत्तियों का रस चूसते हैं.
  • वायरस फैलाते हैं.

उपचार: इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/लीटर पानी.

कटुआ कीट

  • पौधों को जड़ से काट देता है.

उपचार: खेत की तैयारी के समय क्लोरपायरीफॉस धूल का प्रयोग.

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खुदाई और भंडारण

खुदाई से 10-12 दिन पहले पौधों के तनों को काट देना चाहिए. इससे कंद की बाहरी सतह मजबूत हो जाती है.

खुदाई के बाद—

  • 2-3 दिन छाया में सुखाएं.
  • छोटे, कटे और रोगग्रस्त आलू अलग करें.
  • ग्रेडिंग के बाद जूट के बोरों में भरें.
  • आवश्यकता अनुसार कोल्ड स्टोरेज में रखें.

कृषि वैज्ञानिक की सलाह

कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश सिंह का कहना है कि उत्तर बिहार के किसानों के पास आलू उत्पादन बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं. यदि किसान प्रमाणित बीज, संतुलित उर्वरक, समय पर सिंचाई, रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं, तो कम लागत में अधिक उत्पादन लेकर आलू की खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है.

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By Aaruni Thakur

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