Bihar Panchayat Delimitation: बिहार में आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों के नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया तेज हो गई है. राज्य निर्वाचन आयोग 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का कार्य करा रहा है. संयुक्त निर्वाचन आयुक्त ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर निर्धारित डाटा आयोग के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने का निर्देश दिया है. इस प्रक्रिया से जिले में पंचायतों की मौजूदा संख्या 373 से बढ़कर करीब 500 तक पहुंचने की संभावना है.
1984-85 के गजट से होगा आंकड़ों का मिलान
आयोग के अनुसार राज्य में वर्ष 1984-85 में 1981 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन हुआ था. उस समय प्रकाशित जिला गजट के आंकड़ों की पीडीएफ आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है. अधिकारियों को 1984-85 के दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए प्रखंड व राजस्व ग्रामवार 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों की सटीक एंट्री करने और सूक्ष्मता से मिलान करने को कहा गया है.
पंचायतों की संख्या बढ़ने से ग्रामीणों को होंगे ये बड़े फायदे
नई और छोटी पंचायतों के गठन से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी:
- योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: औसत आबादी व क्षेत्रफल कम होने से नाली-गली, सड़क, आवास और पेयजल योजनाओं की निगरानी आसान होगी.
- जनप्रतिनिधियों तक सीधी पहुंच: मुखिया और वार्ड सदस्यों के लिए हर जरूरतमंद तक पहुंचना और जनसमस्याओं का त्वरित निपटारा करना सुगम होगा.
- फंड का संतुलित वितरण: छोटी प्रशासनिक इकाइयों के बनने से सरकारी अनुदान और विकास राशि का वितरण समान रूप से हो सकेगा.
- नए नेतृत्व को अवसर: नए वार्ड और पंचायतों के सृजन से ग्रामीण राजनीति में नए चेहरों और युवाओं को नेतृत्व के अवसर मिलेंगे.
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