Muzaffarpur News: नगर निगम में 6000 एलइडी स्ट्रीट लाइट की खरीद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. वार्ड पार्षदों ने खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता और बड़े घोटाले की आशंका जतायी है. पार्षदों का कहना है कि कई लाइटें लगने के कुछ ही समय बाद बंद होने लगी हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
लगते ही बंद होने लगीं एलइडी लाइटें
पार्षदों के अनुसार, नगर निगम की ओर से खरीदी गयी एलइडी स्ट्रीट लाइटों को उच्च गुणवत्ता की बताया गया था. इसके बावजूद कई जगहों पर लाइटें लगाने के तुरंत बाद खराब होने लगीं.
पार्षद राजीव कुमार पंकू, सनत कुमार, अर्चना पंडित, अभिमन्यु चौहान और अमित रंजन ने खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि यदि लाइटें उच्च गुणवत्ता की हैं तो उन्हें लगने के साथ ही मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है.
पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम के कुछ कर्मी और इंजीनियर आपूर्तिकर्ता एजेंसी के साथ मिलीभगत कर अलग-अलग गुणवत्ता की लाइटें सप्लाई करवा रहे हैं. उनका यह भी आरोप है कि लाइटों को कुछ चुनिंदा वार्डों में ही लगाया जा रहा है.
एक-एक लाइट की गुणवत्ता जांच की मांग
पार्षदों ने पूरे मामले में खरीदी गयी 6000 एलइडी लाइटों की गुणवत्ता की बारीकी से जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच से ही स्पष्ट होगा कि निगम को किस गुणवत्ता की लाइटें उपलब्ध करायी गयी हैं और खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं.
पार्षदों ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने और पूरे प्रकरण की शिकायत करने की तैयारी शुरू कर दी है.
आईआईटी पटना की जांच रिपोर्ट का इंतजार
पार्षदों ने बताया कि सशक्त स्थायी समिति की बैठक में एलइडी लाइटों की गुणवत्ता की जांच आईआईटी पटना से कराने का निर्णय लिया गया था. लेकिन अब तक जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और रिपोर्ट सामने नहीं आयी है.
पार्षदों का कहना है कि जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं होती, तब तक खरीद और आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं मिल सकेगा.
जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा भुगतान
आरोपों के बीच नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि आपूर्तिकर्ता एजेंसी को भुगतान आईआईटी पटना की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा.
नगर आयुक्त ने कहा कि वह खुद एजेंसी की ओर से आपूर्ति की गयी लाइटों के स्टोर की व्यक्तिगत रूप से जांच करेंगे. उनका कहना है कि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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