मुजफ्फरपुर: ट्रैफिक सिग्नलों पर हर दिन करोड़ों रुपये का ‘ईंधन फूंक’ रहे लोग, जेब पर पड़ रहा असर

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में ट्रैफिक सिग्नलों पर लंबा इंतजार हर दिन करोड़ों रुपये का ईंधन जला रहा है. विशेषज्ञों ने ट्रैफिक प्रबंधन सुधारने और रेड लाइट पर इंजन बंद करने की सलाह दी है, ताकि पेट्रोल-डीजल की बर्बादी और प्रदूषण कम हो सके. पढे़ं पूरी खबर…

मुजफ्फरपुर से संजय कुमार की रिपोर्ट

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और लंबे सिग्नल टाइम अब सिर्फ लोगों का वक्त ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का ईंधन भी बर्बाद कर रहे हैं. शहर के प्रमुख चौराहों पर हर दिन हजारों वाहन मिनटों तक रेड लाइट पर खड़े रहते हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत तेजी से बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रैफिक प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जाए और लोग रेड लाइट पर इंजन बंद करने की आदत अपनाएं, तो बड़ी मात्रा में ईंधन और पैसे की बचत हो सकती है.

ट्रैफिक सिग्नलों पर हर दिन जल रहा लाखों लीटर ईंधन

शहर के 27 प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों पर 60 से 180 सेकंड तक का वेटिंग टाइम आम लोगों पर भारी पड़ रहा है. जिले में करीब 11.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं, जिनमें बड़ी संख्या रोजाना ट्रैफिक सिग्नलों से गुजरती है. आंकड़ों के अनुसार केवल 10 सिग्नलों पर औसतन 60 सेकंड रुकने से प्रतिदिन करीब 1.16 लाख लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत सिर्फ इंतजार में हो रही है.

बाइक और कारों से बढ़ रही सबसे ज्यादा खपत

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बाइक अगर एक मिनट तक स्टार्ट हालत में खड़ी रहती है तो वह औसतन 10 से 17 मिलीलीटर पेट्रोल जला देती है. जिले की करीब 9 लाख बाइकें यदि रोजाना कई सिग्नलों पर रुकती हैं, तो हजारों लीटर पेट्रोल बेवजह खर्च होता है. वहीं कार और एसयूवी भी रेड लाइट पर इंजन चालू रहने से बड़ी मात्रा में डीजल जला रही हैं.

अवैध पार्किंग और जाम बना रहे बड़ी समस्या

शहर के कई प्रमुख चौराहों के आसपास अवैध ऑटो पार्किंग और बेतरतीब ट्रैफिक व्यवस्था जाम की स्थिति को और खराब कर रही है. गर्मी के मौसम में चौपहिया वाहन चालक एसी चलाने के लिए इंजन बंद नहीं करते, जिससे ईंधन की बर्बादी और ज्यादा बढ़ जाती है. इससे प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है.

एमवीआई ने दी इंजन बंद करने की सलाह

जिला एमवीआई राकेश रंजन ने कहा कि जिन चौराहों पर ट्रैफिक दबाव कम है, वहां सिग्नल फ्री सिस्टम लागू किया जा सकता है. वहीं भीड़ वाले इलाकों में सिग्नल टाइम कम करने की जरूरत है. उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि 60 सेकंड से ज्यादा लाल बत्ती होने पर इंजन जरूर बंद करें. इससे ईंधन बचाने के साथ प्रदूषण भी कम होगा.

दोबारा स्टार्ट करने में कम खर्च होता है ईंधन

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में यह गलतफहमी है कि गाड़ी दोबारा स्टार्ट करने में ज्यादा ईंधन खर्च होता है. जबकि बाइक स्टार्ट करने में बेहद कम पेट्रोल और कार स्टार्ट करने में बहुत कम डीजल खर्च होता है. इसके मुकाबले लंबे समय तक इंजन चालू रखना ज्यादा नुकसानदायक है.

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लेखक के बारे में

Published by: Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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