Muzaffarpur News: नगर निगम परिसर में बुधवार को टेंडर प्रक्रिया को लेकर ठेकेदारों के दो गुट आपस में भिड़ गए. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों पक्षों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई, जिससे दोपहर बाद तक निगम कार्यालय में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा. संवेदकों के बीच मचे इस घमासान के बाद एक पक्ष ने जांच न होने पर हाई कोर्ट जाने की चेतावनी दी है.
नियमों की अनदेखी का आरोप, 70-75 लाख तक काम करने वालों ने भी डाला टेंडर
विवाद की मुख्य वजह निविदा में लगाए गए कथित संदिग्ध दस्तावेज और नियमों की अनदेखी है. उमा दुबे, अजीत मिश्रा, अभिषेक कुमार और धीरेंद्र कुमार समेत कई संवेदकों ने नगर आयुक्त को एक संयुक्त शिकायत पत्र सौंपा है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निविदा की शर्तों के अनुसार जिन ठेकेदारों ने एक वित्तीय वर्ष में 70 से 75 लाख रुपये तक का कार्य पूरा कर लिया है, वे इस टेंडर में भाग लेने के पात्र नहीं हैं. इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर ऐसे संवेदकों द्वारा निविदा डाली गई है.
जाली हस्ताक्षर और फर्जी शपथ पत्र का दावा, जांच नहीं होने पर हाई कोर्ट जाने की चेतावनी
शिकायत पत्र में संवेदकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि टेंडर हासिल करने के उद्देश्य से टूल्स एवं प्लांट से संबंधित फर्जी कागजात संलग्न किए गए हैं. सबसे बड़ा दावा शपथ पत्र पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर है. शिकायतकर्ताओं के अनुसार, टूल्स लेने और देने वाले दोनों पक्षों के हस्ताक्षर पूरी तरह जाली हैं. संवेदकों ने नगर आयुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि इस फर्जीवाड़े पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
मुजफ्फरपुर से देवेश कुमार की रिपोर्ट
