देवेश कुमार, मुजफ्फरपुर
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच मुजफ्फरपुर नगर निगम का सियासी पारा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है. आगामी 30 मई को प्रस्तावित सशक्त स्थायी समिति के चुनाव को लेकर नगर निगम के भीतर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है.
समिति में अपनी जगह पक्की करने और वर्चस्व की जंग में पार्षदों को दो धड़ों में बांटकर सियासी बिसात बिछाई जा रही है. अभी तक सामने आ रहे समीकरणों में पूर्व विधायक का खेमा मजबूत और आगे दिखाई दे रहा है.
महापौर-उप महापौर खेमा बैकफुट पर
इस चुनावी मुकाबले में सबसे दिलचस्प स्थिति महापौर और उप महापौर खेमे की बताई जा रही है, जो फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है.
असल मुकाबला पर्दे के पीछे से सक्रिय वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक के गुटों के बीच सिमट गया है. दोनों ही पक्ष अपने-अपने समर्थन में पार्षदों को जोड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं.
नगर निगम के सियासी गलियारों में चर्चा है कि पार्षदों के मौजूदा संख्या बल के आधार पर पूर्व विधायक का पलड़ा भारी माना जा रहा है.
बंद कमरों में चल रही रणनीति
चुनावी बाजी अपने पक्ष में करने के लिए शहर के अलग-अलग स्थानों पर गोपनीय बैठकों का दौर जारी है.
दोनों गुटों की ओर से पार्षदों को अपने पाले में लाने और उन्हें रिझाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं. रणनीति को लेकर इतनी गोपनीयता बरती जा रही है कि कोई भी पक्ष खुलकर अपनी स्थिति बताने को तैयार नहीं है.
प्रस्तावक और समर्थक जुटाने में परेशानी
नगर निगम की सियासत में दूसरे खेमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने उम्मीदवारों के लिए प्रस्तावक और समर्थक जुटाने की बताई जा रही है.
सूत्रों के अनुसार, इस संकट ने कमजोर पड़ रहे गुट की चिंता बढ़ा दी है. वहीं मजबूत खेमा लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा हुआ है.
अब सभी की नजरें 30 मई को होने वाले चुनाव पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति में किस गुट का दबदबा कायम होता है.
