देवेश कुमार, मुजफ्फरपुर
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर जिले में जमीन रजिस्ट्री से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. रोक सूची (प्रोहिबिटेड लिस्ट) में दर्ज जमीन की कथित रूप से हेराफेरी कर रजिस्ट्री करा दी गई.
मामले का खुलासा होने के बाद जिला अवर निबंधक मनीष कुमार के प्रधान लिपिक के माध्यम से इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा की गई है.
इस संबंध में जिला अवर निबंधक कार्यालय की ओर से नगर थाने को पत्र भेजा गया है.
विक्रेता, क्रेता और गवाह पर आरोप
प्राथमिकी दर्ज करने के लिए विक्रेता, क्रेता, पहचानकर्ता और गवाह को आरोपी बनाया गया है.
सभी पर जालसाजी, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज के सहारे जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाया गया है.
कुढ़नी के केरमाडीह गांव का मामला
जिला अवर निबंधक कार्यालय को मिली जानकारी के अनुसार, कुढ़नी अंचल के केरमाडीह गांव की 12 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी. जमीन का मूल्य 4.25 लाख रुपये दर्शाया गया है.
जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित खेसरा पहले से ही रोक सूची में दर्ज था. यह प्रविष्टि बंटवारा वाद संख्या में न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आधार पर की गई थी. इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री हो गई.
यह घटना 11 नवंबर 2025 की बताई जा रही है.
ऑनलाइन एंट्री में बदला गया खेसरा नंबर
कार्यालय की जांच में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन “मेमो ऑफ प्रेजेंटेशन ऑफ डॉक्यूमेंट” में खेसरा संख्या गलत दर्ज की गई थी.
एक अंक के अंतर से पूरा खेल अंजाम दिया गया. इसी वजह से कंप्यूटर सिस्टम में रोक सूची प्रभावी नहीं हो सकी और दस्तावेज का निबंधन हो गया.
आरोप है कि बाद में दस्तावेज में खेसरा संख्या बदलकर रोक सूची वाला दर्ज कर दिया गया और प्रतिबंधित जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई. अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई.
जालसाजी और कूटरचना का मामला
प्रारंभिक जांच में मामला प्रथम दृष्टया जालसाजी और धोखाधड़ी का पाया गया है.
जिला अवर निबंधक कार्यालय ने नगर थाने से अनुरोध किया है कि संबंधित सभी लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाए.
मामले के सामने आने के बाद निबंधन विभाग में भी हड़कंप मच गया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
