Lok Adalat: आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित ई-चालानों के निपटारे को लेकर परिवहन विभाग ने विस्तृत तैयारी शुरू कर दी है. मुजफ्फरपुर में 5 सितंबर से डालसा कैंपस में लंबित चालानों का पूर्व सत्यापन और निबंधन किया जाएगा. इसके लिए परिवहन और ट्रैफिक चालानों के अलग-अलग काउंटर बनाए जाएंगे. पूर्व निबंधन के बाद वाहन मालिकों को टोकन दिया जाएगा, जिसके आधार पर 12 सितंबर को लोक अदालत में चालान का निपटारा कराया जा सकेगा.
Muzaffarpur News: 5 सितंबर से डालसा में शुरू होगा चालान का पूर्व निबंधन
जिला परिवहन पदाधिकारी प्रियंका सिन्हा के अनुसार, जिला जज के निर्देश के आलोक में 5 सितंबर से कोर्ट कैंपस स्थित डालसा में लंबित चालानों का पूर्व सत्यापन और निबंधन किया जाएगा. 6 सितंबर को रविवार होने के कारण अवकाश रहेगा.
डालसा में परिवहन और ट्रैफिक चालानों के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए जाएंगे. संबंधित काउंटर पर चालान का सत्यापन करने के बाद वाहन मालिक को टोकन दिया जाएगा.
90 दिन से पुराने ई-चालानों का होगा निपटारा
परिवहन विभाग के निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में 90 दिनों से अधिक समय से लंबित चालानों का निपटारा किया जाएगा.
पूर्व सत्यापन का उद्देश्य लोक अदालत के दिन चालान खोजने, उसका विवरण तैयार करने और देय राशि की गणना में लगने वाले समय को कम करना है. पहले से मामलों की पहचान होने के कारण लोक अदालत के दिन चालानों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा.
टोल प्लाजा के चालान का उसी जिले में होगा निपटारा
इस बार टोल प्लाजा से निर्गत ई-चालानों के निपटारे को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गयी है. जिस जिले की सीमा में टोल प्लाजा स्थित है, उसी जिले में आयोजित लोक अदालत में उससे संबंधित चालान का निपटारा किया जाएगा.
परिवहन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को लंबित चालानों को समय रहते चिह्नित करने और वाहन मालिकों को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है.
अन्य जिलों में 7 से 11 सितंबर तक होगा सत्यापन
पटना को छोड़कर राज्य के अन्य जिलों में 7 सितंबर से 11 सितंबर तक लंबित चालानों का पूर्व सत्यापन किया जाएगा.
विभाग का मानना है कि लोक अदालत से पहले चालानों का सत्यापन और निबंधन होने से 12 सितंबर को आयोजित होने वाली लोक अदालत में मामलों के निपटारे की प्रक्रिया आसान होगी.
लोक अदालत में अलग-अलग अधिकारी और मशीनें रहेंगी तैनात
लोक अदालत के दिन मामलों के ऑन-द-स्पॉट निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में डीटीओ और ट्रैफिक डीएसपी के साथ पांच अन्य कर्मियों की तैनाती की जाएगी.
इसके अलावा डाटा एंट्री ऑपरेटर, डेस्कटॉप सेट, एचएचडी और पीओएस मशीनें भी उपलब्ध रहेंगी. इससे चालान की राशि जमा करने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा होगी.
17 धाराओं में संशोधित राशि का मिलेगा लाभ
राष्ट्रीय लोक अदालत में वाहन मालिकों को मोटर वाहन अधिनियम की 17 धाराओं में संशोधित शमन राशि का लाभ मिलेगा. इनमें तेज गति, रेड लाइट जंप, गलत दिशा में वाहन चलाना, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और बिना बीमा वाहन चलाने जैसे मामले शामिल हैं.
कुछ प्रमुख मामलों में संशोधित राशि इस प्रकार है:
- बिना हेलमेट वाहन चलाना: 1,000 रुपये की जगह 500 रुपये
- बिना सीट बेल्ट वाहन चलाना: 1,000 रुपये की जगह 500 रुपये
- दोपहिया पर तीन सवारी: 1,000 रुपये की जगह 500 रुपये
- बिना बीमा वाहन चलाना: 2,000 रुपये की जगह 1,000 रुपये
- बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाना: 5,000 रुपये की जगह 2,500 रुपये
- बिना पंजीकरण या फिटनेस वाहन चलाना: 5,000 रुपये की जगह 2,000 रुपये
- बिना लाइसेंस वाले व्यक्ति को वाहन चलाने देना: 5,000 रुपये की जगह 2,500 रुपये
- आपातकालीन वाहन को रास्ता नहीं देना: 10,000 रुपये की जगह 5,000 रुपये
रेड लाइट जंप, स्टॉप साइन और गलत दिशा में वाहन चलाने के मामलों में वाहन की श्रेणी के अनुसार 1,000 से 5,000 रुपये तक संशोधित राशि निर्धारित की गयी है.
95 प्रतिशत से अधिक लंबित चालान ट्रैफिक से जुड़े
विभागीय जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर में लंबित चालानों में 95 प्रतिशत से अधिक मामले ट्रैफिक से संबंधित हैं. ऐसे में लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित चालानों के निपटारे की उम्मीद है.
परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपने लंबित चालान की स्थिति की जानकारी लेकर पूर्व सत्यापन और निबंधन की प्रक्रिया पूरी कराएं, ताकि लोक अदालत के दिन आसानी से मामले का निपटारा कराया जा सके.
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