शहीद खुदीराम बोस: मुजफ्फरपुर का नाम अमर शहीद खुदीराम बोस की शहादत से भी जुड़ा है. 30 अप्रैल 1908 को हुए मुजफ्फरपुर बमकांड के बाद गिरफ्तार किए गए खुदीराम बोस को 11 अगस्त 1908 की सुबह मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दी गई थी. महज 18 वर्ष की उम्र में हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमने वाले खुदीराम बोस आज भी युवाओं के लिए साहस और बलिदान की मिसाल हैं. उनकी शहादत दिवस पर सोमवार को केंद्रीय जेल में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
किंग्सफोर्ड को निशाना बनाने पहुंचे थे खुदीराम और प्रफुल्ल
1908 में अंग्रेज अधिकारी डगलस किंग्सफोर्ड क्रांतिकारियों और राष्ट्रवादियों पर कठोर कार्रवाई के लिए कुख्यात थे. उन्हें निशाना बनाने की जिम्मेदारी युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी को दी गई थी. दोनों 24 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर पहुंचे और कई दिनों तक किंग्सफोर्ड की गतिविधियों पर नजर रखते रहे.
लेखक अरिंदम भौमिक की पुस्तक के अनुसार, दोनों ने कई दिनों तक कोर्ट और किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का जायजा लिया. 30 अप्रैल की शाम यूरोपियन क्लब के पास किंग्सफोर्ड की बग्घी समझकर खुदीराम बोस ने बम फेंका. हालांकि बग्घी में किंग्सफोर्ड नहीं थे. इसमें वकील प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और उनकी बच्ची की मौत हो गई.
वैनी से गिरफ्तार हुए थे खुदीराम बोस
घटना के बाद खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी अलग-अलग रास्तों से निकल गए. खुदीराम बोस पूसा के वैनी स्टेशन के पास पकड़े गए, जबकि प्रफुल्ल चाकी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को गोली मार ली.
यह घटना इतिहास में मुजफ्फरपुर बमकांड के नाम से दर्ज हुई. खुदीराम बोस के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई 21 मई 1908 से शुरू हुई. अपील खारिज होने के बाद 11 अगस्त 1908 को उन्हें मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दे दी गई.
आज भी जेल में याद की जाती है शहादत
खुदीराम बोस की शहादत की याद में मुजफ्फरपुर केंद्रीय जेल में हर वर्ष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. सोमवार की शाम जेल परिसर और बाहर फूलों तथा रंग-बिरंगे बल्बों से सजावट की जाएगी. जिला प्रशासन की ओर से पहले उनके सेल स्थल पर रखे चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी जाएगी.
इसके बाद सुबह 4:10 बजे फांसी स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी. दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीद को नमन किया जाएगा.
पश्चिम बंगाल से पहली बार पहुंचे 19 लोग
खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि देने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से पहली बार 19 लोगों का जत्था मुजफ्फरपुर पहुंचा है. झारग्राम के सिलसा से प्रकाश हलधर सहित सात लोग सोमवार सुबह पहुंचे. वर्द्धमान से सेवानिवृत्त वायु सेना के चार अधिकारी भी पहली बार श्रद्धांजलि देने आएंगे.
मेदिनीपुर से लेखक अरिंदम भौमिक के नेतृत्व में सात सदस्यीय दल दो दिन पहले ही मुजफ्फरपुर पहुंच चुका है. प्रकाश हलधर अपने साथ मां सिद्धेश्वरी मंदिर का चरणामृत, मेदिनीपुर स्थित खुदीराम बोस की जन्मस्थली की मिट्टी और राधा-कृष्ण की प्रतिमा भी लाए हैं. इन वस्तुओं को फांसी स्थल से जुड़े श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा.
