बाल विवाह पंचायत: समाज से बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति को समूल समाप्त करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा देशव्यापी 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है. इस व्यापक अभियान को लेकर मंत्रालय ने सभी राज्यों और जिला प्रशासनों को विस्तृत दिशा-निर्देश व रूपरेखा जारी कर दी है. अभियान की समाप्ति के उपरांत अब देश भर की ग्राम पंचायतों के लिए बाल विवाह मुक्त होने की स्वघोषणा करना अनिवार्य कर दिया गया है. इस पहल से ग्रामीण स्तर पर मुखिया और निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी.
निगरानी के लिए जमीनी तंत्र होगा सक्रिय
बाल विवाह के किसी भी संभावित प्रयास को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने के लिए ग्राम स्तर के कर्मियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है:
- क्षेत्रीय कर्मियों की जिम्मेदारी: आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, एएनएम और जीविका दीदियां अपने-अपने पोषक क्षेत्रों में सघन नजर रखेंगी.
- त्वरित सूचना तंत्र: कहीं भी बाल विवाह की सुगबुगाहट या तैयारी की सूचना मिलते ही ये कर्मी तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाएंगी, ताकि समय रहते विवाह रुकवाया जा सके.
पोर्टल पर स्वघोषणा के बाद मिलेगा प्रमाण पत्र
महिला एवं बाल विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने मंत्रालय के निर्देशों के आलोक में सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
- आधिकारिक पोर्टल पर एंट्री: यदि वर्तमान में कोई पंचायत बाल विवाह मुक्त है अथवा अभियान के दौरान मुक्त होती है, तो उसका विवरण निर्धारित पोर्टल पर दर्ज करना होगा.
- प्रमाण पत्र का वितरण: मंत्रालय द्वारा जारी निर्धारित फॉर्म भरकर सत्यापन कराने के बाद संबंधित ग्राम पंचायत को आधिकारिक बाल विवाह मुक्त प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा.
स्कूलों की सहभागिता और दो वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड
अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में विशेष जागरूकता सत्र चलाए जाएंगे और किशोर-किशोरियों के समूहों को जोड़ा जाएगा. प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए जाएंगे, जिन पर नागरिक अपनी पहचान गोपनीय रखकर शिकायत दर्ज करा सकेंगे. वहीं, विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार इस प्रमाणीकरण प्रक्रिया में केवल उन्हीं ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जहां विगत दो वर्षों में बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया हो.
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