Muzaffarpur News: बिहार के निबंधन कार्यालयों में लागू की गई पेपरलेस निबंधन (रजिस्ट्री) प्रणाली को लेकर सरकार और दस्तावेज नवीस (कातिब) आमने-सामने आ गए हैं. राज्यभर के दस्तावेज नवीस संघ द्वारा जताए जा रहे तीव्र विरोध और मांग पत्रों के बीच मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग (निबंधन) ने एक औपचारिक पत्र जारी किया है. सरकार के इस रुख से असंतुष्ट होकर दस्तावेज नवीस संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिससे राज्यभर के रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गए हैं.
दस्तावेज नवीस संघ के विरोध के बीच आया सरकारी पत्र
दस्तावेज नवीस एवं मुद्रांक विक्रेता संघ ने पटना, दानापुर, महुआ, लालगंज सहित पूरे राज्य में पेपरलेस व्यवस्था, डिजिटल सिग्नेचर और वॉलेट रिचार्ज की सुविधा को लेकर विभाग के समक्ष अपनी मांगें रखी थीं. इसी के आलोक में उप निबंधन महानिरीक्षक डॉ. संजय कुमार ने जिला अवर निबंधक, वैशाली (हाजीपुर) को पत्र भेजकर विभागीय स्थिति स्पष्ट की है. हालांकि, संघ का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने के बजाय जबरन फैसले थोप रही है.
तीन चरणों में पूरे राज्य में लागू हुई पेपरलेस प्रणाली
विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, राज्य के निबंधन कार्यालयों को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की गई है: पहला चरण (11 जुलाई 2026): 10 चयनित निबंधन कार्यालयों में व्यवस्था शुरू की गई. दूसरा चरण (03 अगस्त 2026): 40 अन्य निबंधन कार्यालयों को इससे जोड़ा गया. तीसरा चरण (17 अगस्त 2026): शेष बचे सभी 91 अवर निबंधन कार्यालयों में भी इसे लागू कर दिया गया.
वॉलेट रिचार्ज व डिजिटल सिग्नेचर पर फंसा पेंच, बढ़ी नाराजगी
दस्तावेज नवीसों की सबसे मुख्य मांग डिजिटल सिग्नेचर और वॉलेट रिचार्ज को लेकर है, जिससे वे दस्तावेज तैयार कर सकें. सरकारी पत्र में स्वीकार किया गया है कि ई-निबंधन सॉफ्टवेयर में तैयार किए जा रहे ''Service Provider Module'' की टेस्टिंग के दौरान कई तकनीकी त्रुटियां (Bugs) पाई गई हैं. विभाग का कहना है कि त्रुटिरहित मॉड्यूल तैयार होते ही यह सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी. इसी व्यवस्था के पूरी तरह तैयार न होने और आधी-अधूरी तैयारी के साथ पेपरलेस सिस्टम लागू किए जाने से दस्तावेज नवीसों में भारी रोष है.
अनिश्चितकालीन हड़ताल से रजिस्ट्री का काम पूरी तरह ठप
दस्तावेज नवीस संघ का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता और सॉफ्टवेयर की सभी तकनीकी खामियों को दूर नहीं कर लिया जाता, तब तक वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे. हड़ताल की वजह से जमीन-मकान की खरीद-बिक्री करने वाले आम लोगों की परेशानी बढ़ने वाली है, वहीं सरकार को भी रोजाना करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा.
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