मुजफ्फरपुर से देवेश कुमार की रिपोर्ट
Budhi Gandak Deforestation: जिले के मोतीपुर प्रखंड अंतर्गत बूढ़ी गंडक नदी के बांध किनारे बड़े पैमाने पर सरकारी पेड़ों की अवैध कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है.मोरसंडी, अंजनाकोट एवं आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों ने तिरहुत वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) को लिखित आवेदन देकर वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं.ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन महीनों के भीतर क्षेत्र से सैकड़ों कीमती पेड़ अवैध रूप से काटे जा चुके हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से इस माफिया तंत्र पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है.इससे स्थानीय लोगों में काफी रोष है.
रात के अंधेरे में काटे जा रहे सेमल के पेड़
ग्रामीणों के अनुसार मोरसंडी और अंजनाकोट बांध के इलाकों में हर हफ्ते दर्जनों पेड़ काटे जा रहे हैं.तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रात के अंधेरे में इस खेल को अंजाम दे रहे हैं.स्थानीय लोगों ने बताया कि 21 जून की रात करीब 9:30 बजे मोरसंडी बांध पर कुछ लोगों द्वारा पेड़ काटे जाने की भनक मिली.जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो वहां छह से सात सेमल के पेड़ कटे हुए पाए गए.
सूचना के बाद भी नहीं पहुंचे वन कर्मी
इसकी तुरंत सूचना वन विभाग और मोतीपुर थाना को दी गई.थाने की ओर से एक चौकीदार को मौके पर भेजा गया, लेकिन देर रात तक वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा.ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने लकड़ी के टुकड़ों को जब्त करने के बजाय उसे वहीं खुले में छोड़ दिया.
डीएफओ बोले: स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज
इस गंभीर मामले को लेकर तिरहुत वन प्रमंडल के डीएफओ ने बताया कि ग्रामीणों से मिली शिकायत को गंभीरता से लिया गया है.उन्होंने कहा कि इस अवैध कटाई के संबंध में स्थानीय मोतीपुर थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करा दी गई है.इसके साथ ही अवैध कटाई में शामिल तस्करों और असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है.जल्द ही आरोपियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाएगी.
