बीईयू की लापरवाही से एमआईटी के रोबोटिक्स छात्रों का रिजल्ट फंसा, भविष्य अधर में

बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी (बीईयू) की घोर लापरवाही के कारण एमआईटी मुजफ्फरपुर के बायोमेडिकल और रोबोटिक्स इंजीनियरिंग के छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. एनपीटीईएल परिणाम अपडेट न होने से छात्र गुस्से में हैं.

MIT Muzaffarpur Result: एमआईटी मुजफ्फरपुर के बायोमेडिकल और रोबोटिक्स इंजीनियरिंग संकाय के 2022 बैच के छात्रों का भविष्य बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी (बीईयू) की घोर लापरवाही के कारण अधर में लटक गया है. यह इस संकाय का पहला बैच है, जिसका एनपीटीईएल (NPTEL) परिणाम अब तक विश्वविद्यालय के पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया है. स्थिति यह है कि बिना किसी गलती के पूरे बैच के छात्रों को परिणाम में एबी (अनुपस्थित) दर्शा दिया गया है. इससे छात्रों में भारी रोष है.

परीक्षा देने के बाद भी रिजल्ट में दिखा दिया 'अनुपस्थित'

पीड़ित छात्रों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि बीईयू से पाठ्यक्रम निर्धारित होने के बाद, कॉलेज प्रशासन के निर्देश पर सभी ने एनपीटीईएल पाठ्यक्रम का फॉर्म भरा और सफलतापूर्वक परीक्षा भी दी. इस परीक्षा का परिणाम भी घोषित हो चुका है. इसके बावजूद, बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी द्वारा अब तक इसे आधिकारिक पोर्टल पर साझा नहीं किया गया है. इस गंभीर मसले पर कॉलेज प्रशासन ने भी विश्वविद्यालय को चार बार लिखित ई-मेल भेजे हैं, लेकिन वहां से अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.

छात्रों पर बनाया जा रहा पूरक परीक्षा फॉर्म भरने का दबाव

शुरुआत में छात्रों को यह आश्वासन दिया गया था कि आठवें सेमेस्टर में परिणाम को पोर्टल पर अपडेट कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. अब पीड़ित छात्रों पर जबरन पूरक (सप्लीमेंट्री) परीक्षा का फॉर्म भरने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है. विश्वविद्यालय की इस प्रशासनिक चूक के कारण छात्रों को एमटेक में उच्च शिक्षा के लिए नामांकन लेने के साथ-साथ सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरी के बेहतरीन अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है.

पहले इलेक्ट्रिकल ब्रांच के रिजल्ट में भी हुई थी ऐसी गड़बड़ी

विश्वविद्यालय की इस प्रशासनिक उदासीनता से छात्रों का करियर दांव पर लग गया है. छात्रों ने जल्द से जल्द पोर्टल पर सही परिणाम अपडेट करने की मांग की है. बता दें कि इससे पहले इलेक्ट्रिकल ब्रांच के परिणाम में भी इसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आई थी. उस समय भी कई बार रिमाइंडर भेजे जाने और छात्रों के विरोध के बाद ही परिणाम में सुधार किया गया था.

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