मुजफ्फरपुर नकली स्टांप: कोर्ट परिसर में फर्जीवाड़े और राजस्व को चूना लगाने से जुड़े बहुचर्चित नकली न्यायिक स्टांप बिक्री मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल में बंद तीन मुख्य आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत के इस फैसले के बाद न्यायिक और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
जेल में बंद हैं तीन मुख्य आरोपित
नकली स्टांप मामले में जिन तीन आरोपितों की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज की है, उनमें प्रभात चौधरी, मुरारी कुमार और राजेश कुमार उर्फ सिद्धार्थ कुमार शामिल हैं. तीनों आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं. अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपितों का कृत्य न्यायिक व्यवस्था की शुचिता और सरकारी राजस्व दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ है, लिहाजा इन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता.
मामले के मुख्य बिंदु:
- कोर्ट परिसर में खुलेआम फर्जी और जाली न्यायिक स्टांप बेचे जाने का हुआ था बड़ा खुलासा.
- कार्यपालक दंडाधिकारी (पूर्वी) रामनाथ कुमार की जांच के बाद दर्ज कराई गई थी नगर थाने में प्राथमिकी.
- मामले में कुल चार नामजद आरोपितों के खिलाफ दर्ज हुआ था गंभीर धाराओं में केस.
- तीन आरोपित प्रभात चौधरी, मुरारी कुमार और राजेश कुमार उर्फ सिद्धार्थ कुमार पहले से हैं जेल में बंद.
चौथे आरोपित की तलाश में पुलिस कर रही छापेमारी
इस पूरे रैकेट में शामिल चौथा नामजद आरोपित सत्यम अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए नगर थाना पुलिस और विशेष जांच टीम लगातार संभावित ठिकानों पर सघन छापेमारी कर रही है. पुलिस का कहना है कि फरार आरोपित पर तकनीकी और गुप्त निगरानी के जरिए शिकंजा कसा जा रहा है, ताकि उसे शीघ्र सलाखों के पीछे भेजा जा सके और पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें.
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