बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी, आचार्य जयमंत मिश्र की शतवार्षिकी पर जुटेंगे देश के विद्वान

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय मैथिली विभाग में 21-22 जुलाई को आचार्य जयमंत मिश्र की शतवार्षिकी के उपलक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. इसमें देश भर से 12 विद्वान हिस्सा लेंगे और आचार्य के व्यक्तित्व व कृतित्व पर शोधपरक विचार रखेंगे.

Maithili National Seminar: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग में आगामी 21 और 22 जुलाई को महान विद्वान आचार्य जयमंत मिश्र की शतवार्षिकी के उपलक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया जा रहा है. यह गरिमापूर्ण आयोजन साहित्य अकादेमी (नई दिल्ली), संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) और विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में संपन्न होगा. साहित्य अकादेमी की ओर से प्राप्त विशेष प्रस्ताव पर कुलपति ने अपनी आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी है, जिसके बाद तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

दो दिनों में होंगे चार अकादमिक सत्र, 12 वक्ता रखेंगे विचार

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा के अनुसार, उद्घाटन सत्र के संपन्न होने के बाद दो दिनों के भीतर कुल चार महत्वपूर्ण अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे. इन तकनीकी और शैक्षणिक सत्रों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कुल 12 मूर्धन्य वक्ता आचार्य जयमंत मिश्र के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपना शोधपरक वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे. इसके साथ ही, देश के चार वरिष्ठ विद्वान इन विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता करेंगे.

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित थे महामहोपाध्याय आचार्य मिश्र

आचार्य जयमंत मिश्र संस्कृत और मैथिली साहित्य के प्रकांड विद्वान थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में 25 कालजयी पुस्तकों का सृजन किया. उनकी प्रसिद्ध कृति 'कविताकुसुमाञ्जलि' के लिए उन्हें प्रतिष्ठित साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. पटना विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले आचार्य मिश्र ने बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से ही अपनी पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की थी. उन्होंने लंगट सिंह महाविद्यालय में संस्कृत शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और बाद में बीआरएबीयू के संस्कृत विभागाध्यक्ष बने. उन्होंने कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में दो कार्यकालों तक सफल नेतृत्व किया. उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार, कालिदास पुरस्कार, बाणभट्ट पुरस्कार, व्यास सम्मान और महामहोपाध्याय की उपाधि से नवाजा गया था.

साहित्य अकादेमी के सहयोग से विभाग का यह तीसरा बड़ा आयोजन

मैथिली विभाग के प्रोफेसर इंदुधर झा ने बताया कि इस कार्यक्रम की रूपरेखा साहित्य अकादेमी के मैथिली परामर्श मंडल के सदस्य केदार कानन और परामर्श मंडल के अध्यक्ष उदय नारायण सिंह 'नचिकेता' के मार्गदर्शन में तैयार की गई है. विभाग के शोधार्थी विनीत कुमार, भगवान देव समेत सभी छात्र इसकी सफलता के लिए सक्रिय हैं. यह तीसरा अवसर है जब साहित्य अकादेमी के प्रायोजन में विभाग द्वारा शतवार्षिकी संगोष्ठी हो रही है. इससे पूर्व वर्ष 2012 में आरसी प्रसाद सिंह और वर्ष 2022 में सुधांशु शेखर चौधरी की शतवार्षिकी पर संगोष्ठी आयोजित की जा चुकी है. 

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