मुजफ्फरपुर : बिहार विवि का पांच एकड़ में फैला पोखर धोबीघाट में बदल गया है. पिछले आठ वर्षों से विवि ने अपनी इस संपत्ति का इस्तेमाल नहीं किया है. पूरे पोखरे में जलकुंभी उग गयी है. विवि के आसपास रहने वाले लोग यहां आकर कपड़े धाेते हैं. विवि का पोखर हेल्थ सेंटर के पास है.
विवि के जानकार बताते हैं कि आठ वर्ष पहले इस पोखर से 20 लाख की आय होती थी. यहां मछली पालन किया जाता था. इसकी बंदोबस्ती होती थी. लेकिन आठ वर्ष से विवि ने इस पोखर पर ध्यान देना बंद कर दिया. न इसकी सफाई हुई न इसकी बंदोबस्ती. इसलिए यह लावारिस स्थिति में आ गया.
विवि के पास नहीं है जीर्णोद्धार की योजना : बिहार विवि के पास इस पोखरे के जीर्णोद्धार की योजना नहीं है. विवि के कार्यपालक अभियंता एमपी जायसवाल ने बताया कि पोखरे की स्थिति खराब है, इसके बारे में विवि को जानकारी है. लेकिन अभी इसके लिए योजना नहीं बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है. आगे इस पर काम किया जा सकता है.
विवि के घाटे को कम करने में मिल सकती है मदद: शिक्षक संघ. बिहार विवि ने इस वर्ष 20 करोड़ के घाटे का बजट दिखाया है. बिहार विवि के पीजी शिक्षक संघ के महासचिव डॉ विपिन कुमार राय का कहना है कि अगर विवि इस पोखर का रखरखाव सही तरीके से करती तो विवि के बजटीय घाटे को कम करने में मदद मिलती. विवि प्रशासन को अब भी इस ओर ध्यान देना चाहिए.
सभी चीजों को समझकर जल्द होगा काम: डीओ. बिहार विवि की सीसीडीसी सह डीओ डाॅ अमिता शर्मा ने कहा कि उन्होंने हाल ही में विकास अधिकारी का पद संभाला है, सभी चीजों काे समझकर जल्द सारे विकास के काम किये जायेंगे. पोखर के बारे में भी पताकर उसके विकास के लिए कदम उठाया जायेगा.
