भगवान के प्रेम में जो पागल, वही उत्तम मनुष्य

मुजफ्फरपुर : मझौलिया रोड में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा के सातवें दिन सोमवार को कथावाचिका संगीता किशोरी ने कहा कि दुनिया में संत कहते हैं कि सब पागल हैं. कोई रूप रंग पर, कोई धन संपदा पर, कोई पद-प्रतिष्ठा पर. भगवान के प्रेम में जो पागल, वही उत्तम है. उन्होंने कहा कि गंगा को […]

मुजफ्फरपुर : मझौलिया रोड में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा के सातवें दिन सोमवार को कथावाचिका संगीता किशोरी ने कहा कि दुनिया में संत कहते हैं कि सब पागल हैं. कोई रूप रंग पर, कोई धन संपदा पर, कोई पद-प्रतिष्ठा पर. भगवान के प्रेम में जो पागल, वही उत्तम है. उन्होंने कहा कि गंगा को पार करने के बाद प्रभु वाल्मीकि के आश्रम में पहुंचते हैं. उनसे रहने योग्य जगह के बारे में पूछते हैं.

वाल्मीकि मुस्कराते हुए कहते हैं कि पहले आप बताइए कि आप कहां नहीं हैं? यानी सर्वत्र व्याप्त, वे कहते हैं कि आप उन लोगों के हृदय में वास करें, जिनके कान भगवान के गुणों को सुनने में समुद्र के समान हो.
जो पर नारी को मां समान, दूसरे के धन को मिट्टी समान मानते हों. इस प्रकार उन्होंने चौदह स्थानों की चर्चा की. उधर केवट राज को अकेले आते देखकर सुमंत उदास मन से अयोध्या लौटते हैं. घोड़े भी राम के बिना लौटना नहीं चाहते. दशरथ जी सुमंत को अकेले आते देखकर राम-राम कहते हुए प्राण त्याग देते हैं. भरत को ननिहाल से बुलाया जाता है.
सूनी अयोध्या देखकर उन्हें लगता है कि राम उन्हीं के कारण वन गये हैं तो शोकाकुल हो जाते हैं. वे मां कैकेयी को बहुत भला बुरा सुनाने के मां का त्याग कर देते हैं. संत कहते हैं कि भगवान से जो बिछुड़ावे उसका त्याग ही उचित है. आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष सीपी सिंह, अमरेंद्र मिश्र, संदीप देवव्रत, गोलू, महेश पांडेय, भानू प्रकाश, सुरेंद्र मिश्र व उदय की मुख्य भूमिका रही.

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